जिला पुस्तक मेला में एक भी हिंदी की स्टॉल ना होने से हिंदी भाषियों के विद्यार्थियों में छाई मायूसी

रानीगंज (संवाददाता):रानीगंज के सीआरसोल राज मैदान में 6 दिवसीय छठा जिला पुस्तक मेला का आयोजन किया गया है। मेले का स्वरूप काफी विशाल है मंत्रियों ने उद्घाटन समारोह में रानीगंज अंचल के लोगों से निवेदन किया कि इस पुस्तक मेले से लगभग 50 लाख रुपया की पुस्तकें बिक्री होनी चाहिए क्योंकि भारत के विख्यात प्रकाशक के द्वारा विशेष छूट पुस्तक में दी जा रही है जिसका लाभ खरीदारों को मिलेगा ऐसा अवसर का लाभ उठाएं लेकिन हिंदी विद्यार्थियों का स्टॉल नहीं होने के कारण पुस्तकों की इतनी बिक्री संभव नहीं होगी हिंदी विद्यार्थियों का कहना है कि अगर हिंदी स्टॉल भी इस पुस्तक मेला में रहते तो हम लोग जमकर खरीदारी कर पाते हैं हिंदी भाषा वासियों को 1 वर्ष से इस पुस्तक मेले का इंतजार रहता है लेकिन हिंदी पुस्तकों की स्टॉल नहीं लगाए जाने को लेकर काफी मायूसी हिंदी विद्यार्थियों में देखी जा रही है ‌ इस पुस्तक मेला में 50 पुस्तकों की स्टाल है बांग्ला पुस्तक एवं पश्चिम बंगाल सरकार के सेल्फ हेल्प, तरह तरह तरह के खिलौने की स्टॉल ,खाने के सामान की स्टॉल है परंतु एक भी हिंदी या उर्दू पुस्तक की स्टाल मेला में नहीं है जबकि आंकड़ों के हिसाब से रानीगंज कोयला अंचल में लगभग 60% हिंदी भाषी का निवास है एवं हिंदी वासियों का इस पुस्तक मेले का इंतजार रहता है ताकि वह आपके मनपसंद के लेखकों की पुस्तकें 10% या 15% की छूट पर खरीद सके हिंदी पुस्तक ना मिलने के कारण हिंदी भाषावासी काफी दुखी है हालांकि इस संबंध में आयोजकों का कहना है कि फिलहाल मेंला में 20 स्टॉल खाली है एवं मेला अभी लगातार पांच दिनों तक चलेगा हो सकता है इन 5 दिनों में कोई हिंदी स्टॉल आ जाए इस संबंध में पश्चिम बंगाल राज्य के ग्रंथगार मंत्री सिदिकुला चौधरी से पूछा गया कि मेले में हिंदी का स्टॉल क्यों नहीं है तो उन्होंने जवाब दिया कि आप हिंदी भाषी हैं एवं हिंदीभाषी प्रकाशकों से आप लोग आग्रह करेंगे तो वह मेले में आकर इस पुस्तक मेला में अपना स्टॉल लगाए हालांकि उन्होंने उर्दू के स्टॉल ना लगने के विषय में कहा कि मेले के तहत 10% उर्दू पुस्तक पुस्तकें खरीदने के लिए सरकार द्वारा आरक्षित राशि है परंतु सवाल यह उठता है कि सरकार द्वारा यह आरक्षित राशि तो है परंतु मेले में उर्दू के स्टॉल ही नहीं है तो आखिर वह 10% राशि की पुस्तकें आखिर कहां से खरीदी जाएगी ज्ञात हो कि कोलकाता के पश्चात रानीगंज पुस्तकालय में पुस्तकों का विशाल भंडार है सदैव से इस पुस्तकालय को सरकार से अनदेखी रही है बरसों से लाइब्रेरियन के अभाव में यहां की पुस्तके नष्ट हो रही है सरकार का भी इस और कोई नजर नहीं है इस विषय में मंत्री का कहना है कि सरकार पर आरोप लगाना की पुस्तकों का रखरखाव के दिशा में कार्य नहीं कर रही है बिल्कुल गलत है हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य में कोविड-19 के समय लगभग 34000 पुस्तकें नष्ट हो गई है। ज्ञात हो कि सोमवार को आसनसोल के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा एवं मंत्री मलय घटक के द्वारा पुस्तक मेले का उद्घाटन किया गया । इस पुस्तक मेला में कोलकाता के बांग्ला प्रकाशक आनंद दे पब्लिशर्स जैसे पुस्तक विक्रेताओं का आगमन हुआ है वहीं मेले में एक भी हिंदी स्टॉल ना होने के कारण अंचल के हिंदी भाषा हंसी के लोगों में मायूसी छाई हुई है। वही हिंदी प्रेमियों में मानवीक संस्था के रामजी यादव, साहित्यकार निर्मल कुमार इत्यादि कई लोगों ने कहा कि जिला पुस्तक मेला में हिंदी भाषियों का कोई स्टॉल नहीं होने से हिंदी भाषा स्कूल के विद्यार्थियों को काफी दुख है।

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