
श्री वर्द्धमान जैन संघ में वल्लभ चालीसा एवं नवकार महामंत्र का सामूहिक जाप ।
कोलकाता । श्री वर्द्धमान जैन संघ में मुनि रविन्द्र विजय महाराज, मुनि महेन्द्र विजय महाराज के सानिध्य में महावीर मेरा पंथ, जैन मंत्राज के सदस्य एवं श्रावक – श्राविका सामूहिक नवकार महामंत्र का जाप एवं वल्लभ चालीसा का पाठ कर भाव – विभोर हो गये । संस्था के ट्रस्टी रतन चन्द बांगाणी, मुल्तान चन्द सुराणा, दिलीप दुगड़, महेन्द्र सुराणा, नरेन्द्र बांठिया, चातुर्मास प्रबन्ध समिति के संयोजक माणक चन्द सेठिया, मोहनलाल कोचर, शांतिलाल रामपुरिया, देवेन्द्र कोचर ने अतिथियों एवं श्रावक – श्राविकाओं का स्वागत किया ।

मुनि रविन्द्र विजय महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा नवकार महामंत्र जैन धर्म का पवित्र मंत्र है, जिसे ‘नमस्कार मंत्र’ या ‘पंच परमेष्ठी मंत्र’ भी कहा जाता है । नवकार महामंत्र में पांच सर्वोच्च आध्यात्मिक गुणों (पंच परमेष्ठी) को नमन किया गया है । मंत्र पांच परम पदों (आत्माओं के उच्च स्वरूप) को नमस्कार करता है । णमो अरिहंताणं के अंतर्गत जो अरिहंत) हैं, जिन्होंने अपने भीतर के क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे आंतरिक शत्रुओं को जीत लिया है तथा णमो सिद्धाणं के अंतर्गत जो सिद्ध हैं, जो पूरी तरह मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त कर चुके हैं एवं णमो आयरियाणं के अंतर्गत जो आचार्य हैं, जो धार्मिक आचरण और आत्म-साक्षात्कार का मार्ग दिखाते हैं, उन्हें नमन । णमो उवज्झायाणं के अंतर्गत जो उपाध्याय हैं, जो शास्त्रों और ज्ञान की शिक्षा देते हैं एवं णमो लोए सव्व साहूणं के अंतर्गत जो साधु हैं, जो इस लोक में संयम और सम्यक् चरित्र के मार्ग पर चल रहे हैं, उन्हें नमन । एसो पंच णमोक्कारो, सव्व पावप्पणासनो – इन पांचों को किया गया यह नमस्कार, सभी प्रकार के पापों का नाश करने वाला है और सभी कल्याणकारी वचनों में यह मंगलकारी है ।

छगन मल मोतीलाल सिरोहिया, नवीन कोचर, महेन्द्र डागा, पारस सावनसुखा, सुरेश बांगाणी, शिखर चन्द बांठिया, अशोक बांठिया, सौरभ सुराणा, आनन्द बांगाणी, अतुल कोचर, पारस कोचर एवं कार्यकर्ता सक्रिय रहे ।
