जामुड़िया के आखलपुर अस्पताल में ‘टीबी मुक्त भारत दिवस’ पर जागरूकता कार्यक्रम, विधायक डॉ. बिजन मुखर्जी ने कहा—सामूहिक प्रयास से ही टीबी पर लगेगी पूरी तरह रोक

जामुड़िया। जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आखलपुर अस्पताल में ‘टीबी मुक्त भारत दिवस’ के अवसर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जामुड़िया के विधायक डॉ. बिजन मुखर्जी मुख्यरूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर अस्पताल के चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और स्थानीय लोगों ने क्षय रोग यानी टीबी के उन्मूलन को लेकर जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान लोगों को टीबी के लक्षण, समय पर जांच, नियमित उपचार और रोगियों के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक डॉ. बिजन मुखर्जी ने कहा कि टीबी कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। समय पर इसकी पहचान और उचित उपचार शुरू होने पर मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। उन्होंने कहा कि बीमारी को समाप्त करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि लोग इसके लक्षणों को नजरअंदाज न करें और किसी भी प्रकार की आशंका होने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच कराएं। उन्होंने कहा कि कई बार लोग लंबे समय तक खांसी या लगातार कमजोरी जैसी समस्याओं को सामान्य मानकर उपचार में देरी कर देते हैं। ऐसी लापरवाही बीमारी को गंभीर बना सकती है। इसलिए लगातार खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, भूख कम लगना, तेजी से वजन कम होना या लगातार कमजोरी महसूस होने जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए। विधायक ने कहा कि टीबी के उन्मूलन के लिए केवल मरीज का उपचार करना पर्याप्त नहीं है। बीमारी के प्रति लोगों में सही जानकारी और जागरूकता पैदा करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और समाज के सभी वर्गों से अपील की कि टीबी के संभावित मरीजों की पहचान, जांच और उपचार में सहयोग करें तथा लोगों को नियमित रूप से दवा लेने के लिए प्रेरित करें। डॉ. बिजन मुखर्जी ने कहा कि टीबी से पीड़ित मरीजों को सामाजिक भेदभाव का सामना नहीं करना चाहिए। बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को परिवार और समाज के सहयोग की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि टीबी मरीजों से दूरी बनाकर या उन्हें सामाजिक रूप से अलग-थलग करके समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। इसके बजाय उन्हें मानसिक संबल देने और उपचार पूरा कराने में सहयोग करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मरीज यदि चिकित्सक की सलाह के अनुसार नियमित रूप से दवाओं का सेवन करता है और उपचार की निर्धारित अवधि पूरी करता है तो उसके स्वस्थ होने की संभावना बहुत अधिक होती है। बीच में दवा छोड़ देना मरीज के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसलिए परिवार के सदस्यों को भी उपचार के दौरान मरीज का ध्यान रखने और उसे नियमित दवा लेने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण हथियारों में से एक है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को बीमारी के शुरुआती लक्षणों के बारे में जानकारी देना आवश्यक है, ताकि मरीज समय पर जांच और उपचार करा सकें। विधायक ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने अस्पताल के चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से भी आग्रह किया कि टीबी को लेकर लोगों के बीच लगातार जागरूकता अभियान चलाया जाए और जरूरतमंद मरीजों को उपचार के दौरान हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने, बीमारी से पीड़ित लोगों के साथ भेदभाव नहीं करने तथा उन्हें उपचार पूरा करने में सहयोग देने का संकल्प लिया। इस दौरान लोगों को यह संदेश दिया गया कि समय पर जांच और नियमित उपचार से टीबी को नियंत्रित किया जा सकता है। विधायक डॉ. बिजन मुखर्जी ने कहा कि टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयास से ही इस बीमारी के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जा सकती है। उन्होंने कहा कि लोगों को भयभीत होने के बजाय जागरूक होने की आवश्यकता है। यदि बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो बिना संकोच जांच करानी चाहिए और यदि टीबी की पुष्टि होती है तो चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार पूरा करना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक जागरूकता और जिम्मेदार नागरिक भागीदारी के माध्यम से टीबी मुक्त समाज के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की जा सकती है।

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