
आसनसोल। पश्चिम बंगाल और झारखंड की सीमा पर संचालित कथित अवैध लॉटरी कारोबार के विरुद्ध पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। झारखंड के चिरकुंडा क्षेत्र में गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक कथित अवैध लॉटरी टिकट प्रिंटिंग यूनिट का भंडाफोड़ किया। कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में कथित अवैध लॉटरी टिकट, प्रिंटिंग मशीनें तथा टिकट छापने में प्रयुक्त अन्य उपकरण जब्त किए गए। पुलिस इस कार्रवाई को सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय अवैध लॉटरी नेटवर्क के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध लॉटरी टिकटों के निर्माण और बिक्री की सूचना मिल रही थी। इसी आधार पर योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की गई। मौके से बड़ी संख्या में कथित अवैध लॉटरी टिकटों के अलावा प्रिंटिंग मशीन, कंप्यूटर तथा अन्य तकनीकी उपकरण बरामद किए गए। जब्त सामग्री की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क का संचालन किन-किन क्षेत्रों तक फैला हुआ है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद भी स्थानीय लोगों का आरोप है कि पश्चिम बंगाल और झारखंड के कई सीमावर्ती इलाकों में आज भी खुलेआम अवैध लॉटरी टिकटों की बिक्री जारी है। स्थानीय लोगों के अनुसार पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के सिउड़ी, दुबराजपुर और काकरतला, पश्चिम बर्धमान जिले के पांडवेश्वर, बाराबनी, भनोरा, गौरांडी बस स्टैंड तथा डोमहानी (कुल्टी) सहित झारखंड के दुमका क्षेत्र में भी कथित रूप से अवैध लॉटरी टिकटों का कारोबार जारी है। कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया है कि बाराबनी और लालगंज से सटे क्षेत्रों में रहने वाले कुछ लोग इस कथित नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। आरोपों के दौरान रूपनारायणपुर निवासी “बिकी”, गौरांडी निवासी “सहनवाज़” तथा कुल्टी निवासी “दानिस” के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि इन आरोपों की अब तक किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। संबंधित व्यक्तियों की ओर से भी इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है तथा पुलिस ने भी अभी तक इन नामों के आधार पर किसी गिरफ्तारी अथवा आरोपपत्र दाखिल किए जाने की पुष्टि नहीं की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें प्राप्त शिकायतों और उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है। जांच का उद्देश्य केवल टिकट बेचने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध लॉटरी के निर्माण, आपूर्ति, वितरण और वित्तीय लेन-देन से जुड़े पूरे तंत्र की पहचान करना है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। कानून-व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल-झारखंड की लंबी सीमा का लाभ उठाकर अवैध कारोबार करने वाले गिरोह अक्सर एक राज्य से दूसरे राज्य में गतिविधियां संचालित करते हैं। ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए दोनों राज्यों की पुलिस एवं अन्य जांच एजेंसियों के बीच निरंतर समन्वय, संयुक्त अभियान और नियमित निगरानी आवश्यक है। फिलहाल चिरकुंडा में हुई इस कार्रवाई के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय अवैध लॉटरी नेटवर्क पर पुलिस की नजर और सख्त हो गई है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पुलिस कब और कैसे पहुंचती है।
