
पांडवेश्वर। पांडवेश्वर में भाजपा की बूथ समिति की बैठक के दौरान पार्टी के दो गुटों के बीच हुए विवाद ने संगठन के भीतर चल रही गुटबाजी को उजागर कर दिया। बैठक स्थल के बाहर नए और पुराने कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों के बीच पहले तीखी कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। घटना के बाद कुछ समय के लिए इलाके में तनाव का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार, पांडवेश्वर के शंकरपुर कैंटीन में भाजपा की संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में पांडवेश्वर के भाजपा विधायक जितेंद्र तिवारी सहित पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे। इसी दौरान बैठक स्थल के बाहर दो गुटों के बीच विवाद शुरू हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले दोनों पक्षों में बहस हुई, जिसके बाद मामला हाथापाई तक पहुंच गया। घटना से कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी मच गई और कुछ समय के लिए बैठक का माहौल भी प्रभावित हुआ। पार्टी के एक वर्ग का आरोप है कि विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद तृणमूल कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष एव पूर्व विधायक नरेन चक्रवर्ती के करीबी माने जाने वाले एक नेता हाल ही में भाजपा में शामिल हुए हैं। आरोप है कि बैठक से पहले उनके समर्थकों ने भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ दुर्व्यवहार किया तथा उनके साथ मारपीट की। इसी घटना के बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और विवाद बढ़ गया। हालांकि, इन आरोपों पर भाजपा के दूसरे गुट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, पार्टी नेतृत्व की ओर से भी घटना को लेकर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बूथ समिति जैसी महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक के दौरान सार्वजनिक रूप से हुई इस झड़प ने पांडवेश्वर में भाजपा की आंतरिक एकजुटता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि हाल के दिनों में पार्टी में शामिल हुए नए नेताओं और लंबे समय से संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल की कमी इस विवाद का प्रमुख कारण हो सकती है। घटना के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई और बैठक की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई। हालांकि, इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में भाजपा की संगठनात्मक स्थिति और आंतरिक समन्वय को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। वही फिलहाल पार्टी की ओर से घटना की आधिकारिक पुष्टि या किसी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है। वहीं, पूरे मामले पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।
