मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बाइकों पर पुलिस का शिकंजा, आसनसोल में विशेष अभियान चलाकर काटे चालान

आसनसोल। ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण और यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के ट्रैफिक विभाग ने मॉडिफाइड साइलेंसर लगी मोटरसाइकिलों के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों पर वाहनों की सघन जांच किया गया।मॉडिफाइड साइलेंसर लगाकर तेज आवाज करने वाले वाहनों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए चालान काटे जा रहे हैं। सोमवार शाम देर शाम तक आसनसोल के जीटी रोड सहित शहर के कई प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की विशेष टीम तैनात रही। अभियान के दौरान पुलिस ने एक-एक कर संदिग्ध मोटरसाइकिलों को रोककर उनकी तकनीकी जांच की। अधिकारियों ने वाहनों को स्टार्ट कराकर साइलेंसर से निकलने वाली ध्वनि का परीक्षण किया। जिन वाहनों में अवैध रूप से मॉडिफाइड साइलेंसर लगे पाए गए अथवा जिनसे निर्धारित मानकों से अधिक शोर उत्पन्न हो रहा था, उनके विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया गया।
ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ समय से शहर में तेज आवाज वाले मॉडिफाइड साइलेंसर की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। ऐसे वाहनों के कारण न केवल ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य वाहन चालकों और राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और रिहायशी इलाकों में इस तरह का शोर लोगों के लिए गंभीर समस्या बन जाता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण का सबसे अधिक असर वरिष्ठ नागरिकों, छोटे बच्चों, मरीजों तथा हृदय एवं मानसिक रोग से पीड़ित लोगों पर पड़ता है। इसलिए ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए पूरे पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क पर अनावश्यक शोर फैलाने वाले किसी भी वाहन को बख्शा नहीं जाएगा।अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान केवल जीटी रोड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शहर के अन्य प्रमुख मार्गों, बाजार क्षेत्रों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भी नियमित रूप से जांच अभियान चलाया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। सूत्रों के अनुसार, पुलिस उन मैकेनिकों और गैराज संचालकों पर भी नजर रख रही है, जो अवैध रूप से मॉडिफाइड साइलेंसर तैयार करने या वाहनों में लगाने का कार्य कर रहे हैं। यदि जांच में ऐसे लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ट्रैफिक पुलिस की इस कार्रवाई का आम नागरिकों ने स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से तेज आवाज वाले मॉडिफाइड साइलेंसरों के कारण शहर में ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा था और राहगीरों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा था। उनका मानना है कि यदि इस प्रकार का अभियान नियमित रूप से जारी रहा तो शहर में ध्वनि प्रदूषण पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा और यातायात व्यवस्था भी अधिक अनुशासित होगी।

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