
आसनसोल। पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल नगर निगम अंतर्गत कुल्टी क्षेत्र बुधवार को भगवान श्रीजगन्नाथ की भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो उठा। यहां स्थित ऐतिहासिक श्रीजगन्नाथ मंदिर में पिछले 102 वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार भव्य स्नान उत्सव का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, वैदिक रीति-रिवाज और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन किए तथा उनके पवित्र स्नान के साक्षी बने। पूरे मंदिर परिसर में “जय जगन्नाथ” के उद्घोष, शंखध्वनि और भजन-कीर्तन से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार रथयात्रा से पूर्व भगवान श्रीजगन्नाथ का स्नान उत्सव विशेष महत्व रखता है। इसी परंपरा के निर्वहन के लिए कुल्टी के इस ऐतिहासिक मंदिर में प्रतिवर्ष विधि-विधान के साथ भगवान का महाभिषेक कराया जाता है। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का पवित्र जल, गंगाजल, सुगंधित द्रव्यों, चंदन एवं पुष्पों से विधिवत अभिषेक किया। इसके बाद भगवान का आकर्षक श्रृंगार किया गया, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।कुल्टी स्थित इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 102 वर्ष पुरानी अनूठी परंपरा है। सामान्यतः स्नान उत्सव के बाद अधिकांश जगन्नाथ मंदिरों में भगवान को ‘अनवसर’ काल के लिए विश्राम दिया जाता है और मंदिर के कपाट कुछ दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं। किंतु कुल्टी के इस ऐतिहासिक मंदिर में यह परंपरा अलग है। यहां स्नान अनुष्ठान के तुरंत बाद भगवान श्रीजगन्नाथ को विधिवत रथ पर विराजमान कराया जाता है। यही विशिष्ट धार्मिक परंपरा इस मंदिर को अन्य स्थानों से अलग पहचान प्रदान करती है और दूर-दराज़ से श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है। स्नान उत्सव के दौरान सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। आसनसोल के कुल्टी औद्योगिक क्षेत्र सहित पश्चिम बर्धमान के विभिन्न इलाकों तथा पड़ोसी राज्य झारखंड से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे। महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और बुजुर्गों सहित सभी आयु वर्ग के लोगों ने भगवान के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना की। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए सुव्यवस्थित दर्शन व्यवस्था की गई थी, जिससे पूरे आयोजन का संचालन शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।पूरे आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन, हरिनाम संकीर्तन और शंखध्वनि से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण बना रहा। श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ भगवान के जयकारे लगाते रहे और धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता निभाई। स्नान के उपरांत भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला। मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि स्नान उत्सव के सफल आयोजन के साथ ही अब वार्षिक रथयात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस वर्ष रथयात्रा को पहले से अधिक भव्य एवं आकर्षक स्वरूप देने की योजना बनाई गई है, ताकि अधिकाधिक श्रद्धालु इस ऐतिहासिक धार्मिक उत्सव में शामिल होकर भगवान श्रीजगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें। कुल्टी का यह ऐतिहासिक श्रीजगन्नाथ मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। एक शताब्दी से अधिक समय से निरंतर चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा, विश्वास और उत्साह के साथ निभाई जा रही है। यही कारण है कि कुल्टी का स्नान उत्सव प्रत्येक वर्ष हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा के अद्भुत संगम का साक्षी बनता है।
