कोलकाता में मुख्यमंत्री शुभेन्दु ने स्वर्ण झाड़ू से मार्ग बुहार कर किया इस्कान की रथयात्रा का शुभारंभ

कोलकाता, 16 जुलाई । पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को कोलकाता स्थित इस्कॉन की रथयात्रा का शुभारंभ स्वर्ण झाड़ू से प्रतीकात्मक रूप से मार्ग बुहार कर किया। इसके बाद उन्होंने रथ की रस्सी खींची तथा भगवान जगन्नाथ के रथ की आरती कर साष्टांग प्रणाम किया।

मुख्यमंत्री दोपहर लगभग 12 बजे इस्कॉन मंदिर पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने भगवान जगन्नाथ के विग्रह के समक्ष नतमस्तक होकर पूजा-अर्चना की और आरती उतारी। इसके बाद वे श्रील प्रभुपाद के कक्ष में गए, जहां साष्टांग प्रणाम करने के बाद पूरे कक्ष का अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कक्ष को विरासत (हेरिटेज) का दर्जा दिलाने के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ राष्ट्रवादी और सनातन विचारधारा में विश्वास रखने वाले व्यक्ति के रूप में इस्कॉन की रथयात्रा में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि राज्य का विकास भी होगा और हमारी संस्कृति को भी समान रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।

मंदिर में पूजा के बाद मुख्यमंत्री रथ के पास पहुंचे, भगवान के विग्रह पर पुष्पमाला अर्पित की और कहा, “आज का दिन भक्तों का दिन है।” उपस्थित श्रद्धालुओं के अनुरोध पर उन्होंने गौड़ीय भक्ति संगीत की कुछ पंक्तियां भी गाईं। इसके बाद उन्होंने स्वर्ण झाड़ू से रथ मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई कर रथयात्रा का औपचारिक शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने इस्कॉन की सराहना करते हुए मिड-डे मील योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “राज्य में मिड-डे मील किचन स्थापित किए जा रहे हैं, लेकिन इस्कॉन लंबे समय से यह कार्य कर रहा है। देश के 22 बड़े शहरों में स्कूलों के मिड-डे मील की जिम्मेदारी इस्कॉन निभा रहा है।” उन्होंने कहा कि इस्कॉन द्वारा उपलब्ध कराया जाने वाला भोजन पौष्टिक होता है। साथ ही उन्होंने पिछले वर्षों में मिड-डे मील योजना में हुई कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का भी उल्लेख किया।

उल्लेखनीय है कि रथयात्रा को लेकर राज्य सरकार नेइसबारकुछनईपहल की हैं। सरकार ने इस वर्ष राज्य की 60 रथयात्रा समितियों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। इस प्रकार कुल तीन करोड़ रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। सरकार का कहना है कि इस सहायता से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में पारंपरिक रथयात्राओं और उनसे जुड़े सांस्कृतिक आयोजनों को और अधिक व्यवस्थित एवं सुदृढ़ किया जा सकेगा।

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