
अद्भुत स्मरण शक्ति से रचा इतिहास, पूरे पश्चिम बर्धमान जिला और राज्य का बढ़ाया मान
पांडवेश्वर। जिस उम्र में अधिकांश बच्चे ठीक से बोलना सीख रहे होते हैं, उस उम्र में पश्चिम बर्धमान जिले के पांडवेश्वर क्षेत्र के हरिपुर गांव के नन्हे सृजन कुंडू ने अपनी विलक्षण प्रतिभा और अद्भुत स्मरण शक्ति के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। महज 2 वर्ष 8 माह की आयु में सृजन का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स-2026 में दर्ज हुआ है। इस उपलब्धि से न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा पश्चिम बर्धमान जिला और राज्य गौरवान्वित महसूस कर रहा है।सृजन की असाधारण स्मरण शक्ति ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है। इतनी कम उम्र में वह बिना किसी झिझक के हिंदी, बंगला और अंग्रेजी में सप्ताह के सातों दिनों तथा वर्ष के बारह महीनों के नाम सुना सकता है। इसके अलावा उसे 37 देशों के राष्ट्रीय ध्वजों की पहचान, 14 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम, 18 देवी-देवताओं के वाहन, आठ राष्ट्रीय प्रतीक, शरीर के 20 अंगों के नाम, 15 पशु, 15 सब्जियां, छह कीट, छह सरीसृप, 12 धार्मिक मंत्र तथा संपूर्ण हनुमान चालीसा कंठस्थ है। उसकी यह अद्भुत क्षमता हर किसी को हैरान कर देती है। सृजन की इस सफलता के पीछे उसके माता-पिता का निरंतर प्रोत्साहन और मेहनत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उसके पिता सुखेन कुंडू पेशे से सिविक वॉलंटियर हैं, जबकि माता रिम्पा कुंडू गृहिणी हैं। दोनों ने बचपन से ही खेल-खेल में सृजन को विभिन्न विषयों की जानकारी देना शुरू किया। उन्होंने पाया कि सृजन किसी भी बात को एक-दो बार सुनने या देखने के बाद आसानी से याद कर लेता है और फिर बिना किसी गलती के उसे दोहरा देता है। माता रिम्पा कुंडू ने बताया कि जब उन्होंने बेटे को हनुमान चालीसा सिखाई, तो उसने बहुत कम समय में पूरी चालीसा याद कर ली। जब भी उससे सुनाने के लिए कहा जाता, वह बिना रुके पूरी हनुमान चालीसा सुना देता था। बेटे की इस असाधारण प्रतिभा को देखकर परिवार ने उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का निर्णय लिया। इसके बाद पिता सुखेन कुंडू ने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अधिकारियों से ऑनलाइन संपर्क किया और सृजन की विभिन्न प्रतिभाओं के वीडियो भेजे। वीडियो का मूल्यांकन करने के बाद निर्णायक मंडल उसकी स्मरण शक्ति, आत्मविश्वास और प्रस्तुति से बेहद प्रभावित हुआ। सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद सृजन को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स-2026 में स्थान प्रदान किया गया। सृजन की इस उपलब्धि से परिवार, रिश्तेदारों और हरिपुर गांव के लोगों में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया है। सृजन के माता-पिता का कहना है कि उनका सपना केवल बेटे को सफल बनाना नहीं, बल्कि उसे एक अच्छा, संस्कारी और संवेदनशील इंसान बनाना है, जो भविष्य में समाज और देश का नाम रोशन करे।
महज 2 वर्ष 8 माह की आयु में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर सृजन कुंडू ने यह साबित कर दिया है कि यदि बच्चों की प्रतिभा को सही दिशा, उचित प्रोत्साहन और सकारात्मक वातावरण मिले, तो वे बहुत कम उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। सृजन की इस ऐतिहासिक सफलता पर पूरा पश्चिम बर्धमान गर्व महसूस कर रहा है।
