
कोलकाता। 7 जुलाई। भारतीय भाषा परिषद के सभाकक्ष में विगत शनिवार को अत्यंत लोकप्रिय साहित्यिक श्रृंखला ‘काव्य लहरी-3’ (तीसरी लहर) का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। यह विशेष सत्र युगपुरुष स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि को समर्पित रहा, जहाँ उपस्थित प्रबुद्धजनों ने स्वामी जी को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती रंजना झा द्वारा प्रस्तुत मधुर सरस्वती वंदना से हुआ। इसके पश्चात श्री आशीष झुनझुनवाला ने अपने स्वागत वक्तव्य से सभी अतिथियों, रचनाकारों और सुधी श्रोताओं का आत्मीय अभिनंदन किया।
साहित्यिक सत्र में आमंत्रित देश के पांच प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी उत्कृष्ट और ओजस्वी रचनाओं से श्रोताओं से खचाखच भरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। काव्य मंच पर श्री विनोदानंद कुमार, श्री प्रदीप कुमार धानुक, श्रीमती रंजना झा एवं श्री नागेंद्र कुमार दुबे ने अपनी शानदार प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और प्रख्यात रचनाकार श्री सुशील साहिल ने अपने विशेष ‘काव्य स्वर’ से ऐसा समां बांधा कि संपूर्ण सभागार तालियों की गूंज से सराबोर हो उठा। उपस्थित जनसमूह ने सभी रचनाकारों की मुक्तकंठ से सराहना की।

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गिरिधर राय का कुशल संयोजन एवं सधा हुआ, भावपूर्ण संचालन रहा। उनके सारगर्भित वक्तव्य और मंत्रमुग्ध कर देने वाली काव्य प्रस्तुति “मुखिया जी का फैसला” ने पूरे वातावरण को भाव-विभोर कर दिया और श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा।
सभागार में कोल इंडिया के सीवीओ श्री ब्रजेश कुमार त्रिपाठी और ईडी श्री ओपी मिश्रा की उपस्थिति ने सभागार की गरिमा को और बढ़ा दिया। इस अवसर पर दिल्ली से पधारे जाने-माने साहित्यकार श्री कैलाश कुमार मिश्रा एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती पूनम मिश्रा की उपस्थिति विशिष्ट रही। कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए श्री मिश्रा ने कवियों का उत्साहवर्धन किया और कहा कि ‘काव्य लहरी’ जैसे उच्च स्तरीय और निरंतर चलने वाले आयोजन हिंदी व भारतीय भाषाओं के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसकी निरंतरता हमेशा बनी रहनी चाहिए।

समारोह को गरिमा प्रदान करने में भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष डॉ. कुसुम खेमानी का मार्गदर्शन एवं वित्त सचिव श्री घनश्याम सुगला की उपस्थिति व विशेष सहयोग सराहनीय रहा। कार्यक्रम के समापन पर परिषद के निदेशक डॉ. शंभुनाथ ने सभी सम्मानित रचनाकारों, अतिथियों और सुधी पाठकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।
अन्य प्रबुद्ध श्रोताओं में डॉ रश्मि पांडा, रामाकांत सिंह, शिव शंकर सिंह, कुंदन कुमार, प्रणति ठाकुर, भारतीय मिश्रा श्वेता श्वेतांबरी, विनय शर्मा, कंचन राय,शिवकुमार व्यास, डॉ उर्वशी श्रीवास्तव, दुर्गा व्यास, भंवरलाल गट्टानी, शारदा टिबरीवाल, अश्वनी झा, लक्ष्मी जयसवाल, लक्ष्मी अग्रवाल, विजय शर्मा विद्रोही, रामनारायण झा, अमृता चतुर्वेदी, सुशील कांति के एन मिश्रा आदि की उपस्थिति शुरू से अंत तक बनी रही।
