
कोलकाता : 01 जुलाई, सनातन एवं हिन्दी साहित्य को समर्पित संस्था सनातन काव्य- धारा वाराणसी की तृतीय मासिक गोष्ठी आज कैलाशम्, इंदिरा नगर, वाराणसी में विश्व हिंदी शोध -संवर्धन अकादमी के निदेशक एवं काशी के मूर्धन्य साहित्यकार पं. हीरालाल मिश्र “मधुकर” जी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कोलकाता से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार राम पुकार सिंह “पुकार गाजीपुर” उपस्थित रहे। गोष्ठी के प्रथम सत्र में सनातन साहित्य एवं संस्कृति पर परिचर्चा हुई. वक्ताओं ने कहा कि हमें कबीर, तुलसी, रैदास की साहित्य परम्परा को आगे बढ़ाना है जो समाज को दिशा देता है. सनातन साहित्य वह है जिसपर देश, काल, परिस्थिति का प्रभाव नहीं पड़ता। कार्यक्रम – अध्यक्ष हीरालाल मिश्र मधुकर एवं मुख्य अतिथि राम पुकार सिंह पुकार गाजीपुर को चंद्रा साहित्य परिषद ट्रस्ट के अध्यक्ष राम नरेश “नरेश “ ने चंद्रा साहित्य परिषद का सर्वोच्च सम्मान प्रदान कर सम्मानित किया।सनातन काव्य धारा के अध्यक्ष विजय शंकर पाण्डेय ने भी अंगवस्त्रम् और मोमेंटम से सम्मान किया।परिचर्चा के उपरांत काव्य गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। कवि गोष्ठी का आग़ाज़ बाल कवि विवान पांडेय की सरस्वती वंदना से हुआ गोष्ठी में मीडिया प्रभारी विजय चंद्र त्रिपाठी ने पढ़ा “ भला किसी का जितना कर सकते हो करते जाओ” गिरीश पाण्डेय काशिकेय ने पढ़ा “ सनातन पर अनर्गल बोलना अच्छा नहीं लगता” दिनेश दत्त पाठक ने जहां दोहे पढ़े वही प्रमोद कुमार मौर्या ने पर्यावरण पर व्यंग्यात्मक रचना पढ़ी, राम पुकार सिंह ने समसामयिक ग़ज़ल पेश कर सभी की सराहना बटोरी। अन्य रचनाकारों में डॉ. वेद प्रकाश पांडेय, विजय शंकर पांडेय, गौरीशंकर तिवारी, गोपाल केशरी, टीका राम आचार्य, संजीव तिवारी , राम नरेश “नरेश” प्रमुख थे। इन कलमकारों ने भोजपुरी, हिंदी एवं काशिका में रचनाएँ पढ़कर देश की एकता, अखंडता और समरसता का संदेश दिया I गोष्ठी का कुशल संचालन वरिष्ठ कवि परमहंस तिवारी “परम” एवं संयोजन तथा धन्यवाद ज्ञापन गिरीश पाण्डेय “काशिकेय “ ने किया।
