हाईकोर्ट के आदेश से लौटेगी पुरुलिया नगरपालिका बोर्ड, नबेंदु महाली बोले- टीएमसी से अब कोई संबंध नहीं

कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भंग की गई पुरुलिया नगरपालिका की पुरानी बोर्ड एक बार फिर जिम्मेदारी संभालने की तैयारी में है। अदालत ने पूर्व बोर्ड को पहले की तरह कामकाज जारी रखने की अनुमति दी है। हालांकि, पूर्व चेयरमैन नबेंदु महाली ने स्पष्ट किया है कि अब उनका और बोर्ड के अन्य सदस्यों का तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से कोई राजनीतिक संबंध नहीं है।

मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में नबेंदु महाली ने दावा किया कि लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद राजनीतिक कारणों से 16 दिसंबर 2025 को पुरुलिया नगरपालिका बोर्ड को भंग कर दिया गया था। उनका आरोप है कि तत्कालीन सत्तारूढ़ दल के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर नगर विकास विभाग ने यह फैसला लिया था।

महाली ने कहा कि एक निर्वाचित नगरपालिका बोर्ड को इस तरह भंग करना अलोकतांत्रिक कदम था। इसी के विरोध में सभी पार्षदों से चर्चा करने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत के फैसले के बाद अब बोर्ड को पुनर्बहाल करने का रास्ता साफ हो गया है।

जानकारी के मुताबिक, पुरुलिया नगरपालिका के वार्ड संख्या 21 के पार्षद रविशंकर दास और तत्कालीन चेयरमैन नबेंदु महाली ने अलग-अलग रिट याचिकाएं दायर की थीं। बाद में दोनों मामलों को एक साथ सुनवाई के लिए जोड़ा गया। याचिकाओं में बोर्ड भंग कर प्रशासक नियुक्त किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी।

नबेंदु महाली ने कहा कि वे अब किसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे हैं, बल्कि अदालत के आदेश के अनुसार जनता के निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में नगरपालिका का संचालन करेंगे। उन्होंने कहा, “हम ‘ऑफिस ऑफ द काउंसिलर्स’ के रूप में सभी पार्षदों को साथ लेकर जनता के प्रतिनिधि के तौर पर बोर्ड चलाएंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से आने वाली सभी विकास योजनाओं को लागू करने के लिए नगरपालिका काम करेगी। साथ ही उन्होंने दोहराया कि उनका तृणमूल कांग्रेस से अब कोई संगठनात्मक संबंध नहीं है।

महाली ने यह भी बताया कि उन्होंने अभी तक औपचारिक रूप से किसी अन्य राजनीतिक दल की सदस्यता नहीं ली है और उनका मुख्य उद्देश्य विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है।

वहीं, इस मुद्दे पर भाजपा नेता गौतम राय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जिस नगरपालिका बोर्ड को तत्कालीन सरकार ने अयोग्य मानकर भंग किया था, वही बोर्ड अब अदालत के आदेश से वापस आ रहा है। हम न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं। लेकिन यदि वर्तमान सरकारी निर्देशों के अनुरूप काम नहीं हुआ, तो पुराने बोर्ड के कार्यकाल की भी समीक्षा की जाएगी। सरकारी धन या संपत्ति के उपयोग में किसी तरह की अनियमितता पाई गई तो कानून के तहत कार्रवाई होगी।”

उल्लेखनीय है कि नागरिक सेवाएं देने में कथित विफलता के आरोप में पहले पुरुलिया नगरपालिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद 16 दिसंबर 2025 को बोर्ड को भंग कर प्रशासक नियुक्त किया गया था। फिलहाल नगरपालिका का प्रशासन प्रशासक के हाथों में है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होने पर बोर्ड कब औपचारिक रूप से दोबारा कार्यभार संभालेगा, इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है।

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