तृणमूल शासन में पोस्ता से गार्डनरीच तक बड़े हादसों में अब तक किसी को नहीं मिली सजा

कोलकाता, 26 जून । पश्चिम बंगाल में पूर्व की सत्तारूढ़ तृणमूल सरकार में बीते 10 वर्षों में कोलकाता में फ्लाईओवर और इमारत ढहने जैसी कई बड़ी दुर्घटनाएं हुईं, लेकिन किसी भी मामले में अब तक दोषियों को अंतिम सजा नहीं मिल सकी है। जांच और न्यायिक प्रक्रिया लंबी खिंचने के कारण सभी प्रमुख मामले अभी भी अदालतों में लंबित हैं। तारातला गोदाम हादसे के बाद एक बार फिर पुराने हादसों की जांच और जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं।

सबसे पहले 31 मार्च, 2016 को उत्तर कोलकाता के गिरीश पार्क स्थित गणेश टॉकीज मोड़ के पास निर्माणाधीन पोस्ता फ्लाईओवर का एक हिस्सा गिर गया था। इस हादसे में 27 लोगों की मौत हुई थी और 80 लोग घायल हुए थे। तत्कालीन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में फ्लाईओवर के डिजाइन की मंजूरी और गुणवत्ता जांच में गंभीर खामियों की ओर संकेत किया था।

कोलकाता पुलिस की जांच में बयान में विसंगतियां और निगरानी में लापरवाही के आरोप में केएमडीए के चार इंजीनियरों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें सशर्त जमानत मिल गई। विभागीय जांच शुरू हुई, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद उनका निलंबन वापस ले लिया गया। हालांकि, सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके अंतिम पेंशन लाभ और ग्रेच्युटी का एक हिस्सा नियमों के तहत रोका गया है। निर्माण कंपनी आईवीआरसीएल के 10 से अधिक अधिकारियों और इंजीनियरों को भी हत्या सहित विभिन्न धाराओं में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, लेकिन मामला अब भी निचली अदालत में विचाराधीन है।

इसके बाद 4 सितंबर, 2018 को माझेरहाट फ्लाईओवर का एक हिस्सा ढहने से चार लोगों की मौत हुई थी। राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की थी। प्रारंभिक रिपोर्ट में फ्लाईओवर के समय पर रखरखाव नहीं होने को हादसे का प्रमुख कारण बताया गया। लोक निर्माण विभाग के आठ अधिकारियों और इंजीनियरों को निलंबित किया गया था, जबकि मुख्य अभियंता स्तर के तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया। बाद में सभी को जमानत मिल गई। यह मामला भी अभी अदालत में लंबित है और किसी को अंतिम सजा नहीं मिली है।

गार्डनरीच में 17 मार्च, 2024 को निर्माणाधीन बहुमंजिली इमारत गिरने से 14 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के 88 दिन बाद पुलिस ने 730 पृष्ठों का आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया, जिसमें छह लोगों को आरोपित बनाया गया। मामला अभी भी न्यायालय में लंबित है। कोलकाता नगर निगम ने तीन इंजीनियरों को लापरवाही के आरोप में निलंबित किया था, लेकिन लगभग नौ महीने बाद उन्हें फिर बहाल कर दिया गया। इस मामले में भी अब तक किसी को सजा नहीं मिली है।

इधर, हाल में हुए तारातला गोदाम हादसे के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस बार जांच और न्यायिक प्रक्रिया पहले के मामलों की तुलना में तेज गति से आगे बढ़ती है।

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