
रानीगंज। वर्ष 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई कथित राजनीतिक हिंसा से जुड़े मामले में गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस के दो नेताओं को गुरुवार को पुलिस जांच के सिलसिले में उनके गांव ले गई। इस दौरान पुलिस ने एगरा ग्राम पंचायत के पूर्व उपप्रधान अशोक हेला तथा तृणमूल श्रमिक संगठन के नेता विवेक मंडल को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एगरा गांव पहुंचाकर विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चुनावोत्तर हिंसा, राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर हमले तथा भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट और उत्पीड़न से संबंधित मामलों की जांच के क्रम में यह कार्रवाई की गई। जांच से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों और साक्ष्यों को एकत्रित करने के उद्देश्य से दोनों आरोपियों को घटनास्थलों एवं संबंधित स्थानों पर ले जाकर पूछताछ की गई। गुरुवार सुबह केंद्रीय सुरक्षा बल तथा राज्य पुलिस के जवानों की मौजूदगी में दोनों आरोपियों को गांव लाया गया। सुरक्षा कारणों से उनकी कमर में रस्सी बांधी गई थी तथा भारी संख्या में पुलिसकर्मी पूरे अभियान के दौरान उनके साथ मौजूद रहे। पुलिस दल ने आरोपियों की मौजूदगी में गांव के विभिन्न हिस्सों में तलाशी अभियान चलाया और मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने का प्रयास किया।
आरोपियों के गांव पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सड़कों पर एकत्र हो गए। तलाशी अभियान के दौरान कई ग्रामीणों ने आरोपियों के खिलाफ नारेबाजी की और अपना विरोध दर्ज कराया। हालांकि, पुलिस और केंद्रीय बल की सतर्कता के कारण पूरे अभियान के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई तथा स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही। स्थानीय निवासियों के एक वर्ग का आरोप है कि चुनाव के बाद क्षेत्र में राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर विरोधी विचारधारा के लोगों पर दबाव बनाया गया था। इसी कारण ग्रामीणों में लंबे समय से नाराजगी व्याप्त थी, जो तलाशी अभियान के दौरान खुलकर सामने आई। हालांकि अशोक हेला और विवेक मंडल ने इन सभी आरोपों को निराधार बताते हुए स्वयं को निर्दोष बताया है। दोनों नेताओं का कहना है कि उन्हें राजनीतिक कारणों से इस मामले में फंसाया गया है। उनका दावा है कि जांच पूरी होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी और वे निर्दोष साबित होंगे। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को पुलिस ने दोनों नेताओं को गिरफ्तार किया था। बुधवार को उन्हें आसनसोल जिला न्यायालय में पेश किया गया, जहां सुनवाई के बाद अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए दो दिनों की पुलिस हिरासत का आदेश दिया। इसी पुलिस रिमांड के दौरान गुरुवार को यह तलाशी अभियान चलाया गया। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनावोत्तर हिंसा और राजनीतिक उत्पीड़न के मामलों में लंबे समय से कार्रवाई की मांग की जा रही थी और अब जांच एजेंसियां उसी दिशा में कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने रानीगंज और आसपास के राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। क्षेत्र के दो प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं को पुलिस हिरासत में गांव ले जाकर तलाशी अभियान चलाए जाने की घटना को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच की प्रगति और न्यायालय की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
