
कोलकाता(सीताराम अग्रवाल) ! सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम हुआ गोपाल मुखर्जी एवेन्यू। कोलकाता नगर निगम ने एक आदेश जारी कर यह काम किया है। मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने निगम के इस निर्णय की भूरि- भूरि प्रशंसा की है। यह रास्ता पार्क सर्कस इलाके में है। उल्लेखनीय है कि गोपाल पाठा के नाम से विख्यात गोपाल मुखर्जी ने अगस्त 1946 में कोलकाता महानगर में हुये दंगे के दौरान सैकड़ों हिन्दुओं की रक्षा की थी। ग्रेट कोलकाता किलिंग के नाम से कुख्यात इस दंगे के पीछे अविभाजित बंगाल के प्रधानमंत्री सुहरावर्दी का हाथ था। उन्होंने direct action का आदेश दिया था, जिसके तहत साम्प्रदायिक हिंसा में हजारों हिन्दुओं का संहार हुआ था । उस समय उनकी चीख- पुकार सुनने वाला कोई नहीं था। ऐसे समय में गोपाल पाठा ने साहस दिखाया और कुछ लोगों को सशस्त्र रूप से संगठित कर हिन्दुओं की रक्षा के लिए कमर कस ली। मोहल्ले- मोहल्ले में जाकर हिन्दू परिवारों की जानें बचायी और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। 1913 में जन्में गोपाल चन्द्र मुखर्जी का देहावसान 1905 में हुआ है।

इस प्रकार 80 वर्ष के बाद हिन्दुओं के इस महान रक्षक को सम्मान मिला, जिसका सम्पूर्ण श्रेय पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद पहली बार सत्ता में आयी भाजपा सरकार को जाता है। आश्चर्य की बात यह है कि एक आततायी के नाम पर इस सड़क का नाम बदलने के मसले पर आजाद हिन्दुस्तान में पिछले 80 वर्षों के दौरान किसी भी पूर्ववर्ती सरकारों ने विचार नहीं किया। ममता सरकार पर तो मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप भी लगते रहे हैं। वर्तमान भाजपा सरकार तथा इसके नेताओं का स्पष्ट कहना है कि और भी यदि ऐसी बातें नजर में आती हैं तो ऐसे रास्तों के नाम बदल कर देशभक्तों के नाम पर रखें जायेंगे।
