
कोलकाता/ धनबाद (सीताराम अग्रवाल) ¡ पवित्रम सेवा धाम (कोयला नगर) की एक अनूठी और भव्य पहल है — “पवित्रम औषधि वाटिका” संस्था के सदस्यों द्वारा प्रकृति संरक्षण और जन-स्वास्थ्य की दिशा में एक अत्यंत कल्याणकारी संकल्प लिया गया है। इस वाटिका के माध्यम से न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि हमारी सनातन आयुर्वेद परंपरा को भी नई ऊर्जा मिलेगी। पूरे भारतवर्ष से 300 से भी अधिक दुर्लभ औषधिय पेड़ों के बीज मंगवाकर पूरी प्रामाणिकता और वैदिक विधि-विधान के साथ मंत्रोच्चार के बीच इन्हें रोपित किया जाएगा। यह इस अभियान की मुख्य विशेषता है।
खाली हरे नारियल (डाब) के खोकों का उपयोग प्राकृतिक गमलों और जैविक खाद के रूप में किया जाएगा, जो कचरा प्रबंधन और पौधों के पोषण दोनों में मददगार होगा। यह पर्यावरण के विकास के मामले में एक अनूठा प्रयोग होगा।
स्कूल और कॉलेज के छात्र-छात्राओं को वाटिका का भ्रमण कराकर उन्हें इन बहुउपयोगी औषधीय पौधों से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराया जाएगा, ताकि ‘घर-घर आयुर्वेद’ का लक्ष्य पूरा हो सके। इस प्रकार नयी पीढी को इस अभियान से जोड़ा जायेगा, जो आगे चल कर इसे व्यापक रूप देगा।
सबका एक छोटा सा प्रयास और दृढ़ इच्छाशक्ति इस पूरी धरा को औषधीय गुणों से महका सकती है। पवित्रम परिवार ने सभी पर्यावरण प्रेमियों और जागरूक नागरिकों से इस वाटिका के निर्माण में सहभागिता निभाने की भावपूर्ण अपील की
इसके अलावा पवित्रम परिवार ने पुरुषोत्तम मास में गो-सेवा और पुण्य कार्य हेतु सहयोग की अपील भी की है। ”गावो विश्वस्य मातरः — गाय विश्व की माता हैं। एक विज्ञप्ति के माध्यम से संस्था की ओर से मलमास के पावन अवसर पर धर्मप्रेमी भाई-बहनों से गो-सेवा और सेवा धाम के विभिन्न सेवा प्रकल्पों में बढ़-चढ़कर सहयोग करने की भावपूर्ण अपील की गयी है। इस अधिक मास में किया गया दान और सेवा अनंत गुना फल प्रदान करती है। संस्था के मुख्य सेवा प्रकल्प (जहाँ सहयोग कर सकते हैं) हैं-
गो-सेवा एवं चिकित्सा के तहत बीमार, असहाय और घायल गोमाता के इलाज हेतु आधुनिक मशीनें, चिकित्सा उपकरण और दवाइयों की व्यवस्था। गोमाता के सुरक्षित आश्रय के लिए पवित्रम सेवा धाम के भवन निर्माण कार्य में सहयोग। प्रभु के भव्य मंदिर निर्माण कार्य में आपकी श्रद्धा और अंशदान। गोमाता की प्राकृतिक चिकित्सा और जन-कल्याण हेतु पारंपरिक जड़ी-बूटियों एवं औषधीय पौधों की वाटिका तैयार करने में सहयोग।एक छोटा सा सहयोग, गोमाता को दे सकता है नया जीवन। अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा अनुसार किसी भी सेवा प्रकल्प में अपना योगदान दे सकते हैं।
