
कोलकाता, 16 जून । पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा विधायक दल ने मुख्य सचेतक पद के लिए मालदा जिले के इंग्लिश बाजार से पहली बार निर्वाचित विधायक अमलान भादुड़ी के नाम पर सहमति बना ली है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, उनके नाम की अनुशंसा राज्य सरकार को औपचारिक स्वीकृति के लिए भेज दी गई है। आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद वह आधिकारिक रूप से इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का कार्यभार संभालेंगे।
मुख्य सचेतक पद के लिए किसी अनुभवी विधायक के चयन की अटकलें लगाई जा रही थीं। ऐसे में पहली बार विधायक बने अमलान भादुड़ी का नाम सामने आने से राजनीतिक हलकों में आश्चर्य भी देखा गया है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह निर्णय उत्तर बंगाल को अधिक प्रतिनिधित्व देने की भाजपा की रणनीति का हिस्सा है। विधानसभा चुनाव में उत्तर बंगाल ने भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और सरकार गठन के बाद से ही क्षेत्र के नेताओं को प्रमुख जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।
इसी रणनीति के तहत कूचबिहार दक्षिण से विधायक रथींद्र बसु को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं उत्तर बंगाल के छह विधायकों निशीथ प्रमाणिक, शंकर घोष, मालती रावा राय, दीपक बर्मन, आनंदमय बर्मन और जोयेल मुर्मू को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि मालदा जिले की 12 विधानसभा सीटों में से पार्टी ने छह सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन मंत्रिमंडल में जिले का प्रतिनिधित्व केवल जोयेल मुर्मू तक सीमित है। ऐसे में अमलान भादुड़ी को मुख्य सचेतक बनाने का निर्णय मालदा जिले को संगठन और विधानसभा की कार्यप्रणाली में अधिक महत्व देने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
विधानसभा की कार्यवाही में मुख्य सचेतक का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मुख्य सचेतक सदन में विधायी कार्यों के समन्वय, विधायकों के बोलने के समय के निर्धारण, प्रश्नोत्तर सत्र में भागीदारी के प्रबंधन तथा मंत्रियों और मुख्यमंत्री से जुड़े कार्यक्रमों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
परंपरागत रूप से यह जिम्मेदारी अनुभवी विधायकों को सौंपी जाती रही है। तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान यह पद शोभनदेव चटर्जी और निर्मल घोष जैसे वरिष्ठ नेताओं के पास रहा था। वहीं वाम मोर्चा शासनकाल में भी आमतौर पर अनुभवी विधायकों को ही मुख्य सचेतक नियुक्त किया जाता था।
ऐसे में अमलान भादुड़ी की संभावित नियुक्ति को भाजपा नेतृत्व द्वारा युवा और नए चेहरों को आगे लाने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
