विधानसभा प्रदर्शन से 50 विधायकों की दूरी ने तृणमूल में बढ़ती अंदरूनी कलह को किया उजागर

कोलकाता, 20 मई । पश्चिम बंगाल विधानसभा परिसर में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन से पार्टी के लगभग 50 विधायकों की अनुपस्थिति ने संगठन के भीतर बढ़ती अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया है।

मतदान के बाद कथित हिंसा और फुटपाथ दुकानदारों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के विरोध में आयोजित इस धरने में कुणाल घोष और ऋतब्रत बनर्जी समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। हालांकि बड़ी संख्या में विधायकों की गैरमौजूदगी ने हालिया विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष की अटकलों को और तेज कर दिया है।

वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में बड़ी हार के बाद 15 वर्षों के शासन के पश्चात तृणमूल कांग्रेस को विपक्ष में बैठना पड़ा है। इसके बाद से पार्टी नेतृत्व की ओर से कालीघाट में लगातार आंतरिक बैठकें की जा रही हैं। इन बैठकों में पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी दोनों मौजूद रहे हैं, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों के बीच जमीनी स्तर पर सक्रिय राजनीतिक आंदोलन की कमी को लेकर असंतोष बढ़ने की बात सामने आ रही है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को कालीघाट में हुई बैठक में कई विधायकों ने स्पष्ट कहा कि केवल बंद कमरे में बैठकें करने से संगठन को पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता। उन्होंने नेतृत्व से फिर से सड़क पर उतरकर जनसंपर्क बढ़ाने और लोगों के बीच सक्रिय संघर्ष करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सूत्रों का यह भी दावा है कि बैठक में जहांगीर खान से जुड़े आरोपों पर नेतृत्व की चुप्पी और अभिषेक बनर्जी की प्रत्यक्ष राजनीतिक आंदोलनों से दूरी को लेकर भी सवाल उठे। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर बैठक के दौरान तीखी बहस भी हुई।

विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने कथित तौर पर जहांगीर खान के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और निष्कासन की मांग भी की। हालांकि पार्टी ने अब तक इस संबंध में कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी हार के बाद पार्टी के पहले बड़े विरोध कार्यक्रम से लगभग 50 विधायकों की अनुपस्थिति तृणमूल कांग्रेस में बढ़ती दरार का स्पष्ट संकेत है।

पार्टी के भीतर से यह स्वीकार किया गया है कि कार्यकर्ताओं पर हमलों और फुटपाथ दुकानदारों को हटाने के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने के बावजूद पार्टी का आंदोलन अब तक मुख्य रूप से सोशल मीडिया तक ही सीमित रहा है और नेतृत्व सीधे जनता के बीच नहीं पहुंच पाया है।

इसी पृष्ठभूमि में तृणमूल विधायकों ने बुधवार को विधानसभा परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के नीचे धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कथित चुनाव बाद हिंसा और राज्यभर में फुटपाथ दुकानदारों को हटाने की कार्रवाई के विरोध में आयोजित किया गया था।

हालांकि इस कार्यक्रम से बड़ी संख्या में विधायकों की अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर संगठनात्मक अस्थिरता और बढ़ती गुटबाजी की चर्चाओं को और बल दे दिया है।

 

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