
आसनसोल। पश्चिम बंगाल के आसनसोल में लाउडस्पीकर विवाद को लेकर पुलिस चौकी पर हुए हमले के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कहा है कि पुलिस पर हमला किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हिंसा में शामिल लोगों से सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई कराई जाएगी। सरकार ने संकेत दिए हैं कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर अब पश्चिम बंगाल में भी उपद्रवियों से नुकसान की वसूली की जाएगी।
दरअसल, शुक्रवार को आसनसोल में धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकर की आवाज कम कराने के सरकारी आदेश को लागू कराने पहुंची पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और गुस्साए लोगों ने पुलिस चौकी पर हमला कर दिया। इस दौरान चौकी में तोड़फोड़ की गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। घटना के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी सरकार का सख्त रुख जाहिर किया। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों पर हमले किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों से सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की कीमत वसूली जाएगी। शुभेंदु अधिकारी ने कहा,“पहले शासकों का कानून था, अब कानून का शासन है।” उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में पुलिस प्रशासन भय के माहौल में काम कर रहा था और अनुशासन प्रभावित हुआ था। उन्होंने दावा किया कि पहले राजनीतिक हस्तक्षेप के आधार पर पुलिस कार्रवाई होती थी।
मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासन को अवैध बूचड़खानों, ध्वनि प्रदूषण, अवैध टोल वसूली और अवैध रेत तथा कोयला खनन के खिलाफ सरकारी आदेशों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि कानून लागू करते समय शांति बनाए रखी जाए और लोगों से उचित संवाद भी किया जाए। वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने भी आसनसोल की घटना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति या समुदाय कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ मस्जिद का मामला नहीं है। सभी धर्मों और समुदायों के लोगों को कानून के दायरे में रहकर व्यवस्था करनी होगी, नहीं तो कानून अपना काम करेगा।” दिलीप घोष ने चेतावनी देते हुए कहा कि जिन्हें कानून से ऊपर जाकर काम करने की आदत हो गई है, उन्हें अपनी आदत बदलनी होगी, वरना सरकार कार्रवाई करना जानती है। उन्होंने हिंदू समुदाय से भी अपील की कि पूजा-पाठ के दौरान अनावश्यक शोर-शराबा न किया जाए और धार्मिक कार्यक्रम शांति एवं भक्ति के साथ आयोजित किए जाएं।
