पश्चिम बंगाल को चाहिए ठोस औद्योगिक बदलाव—व्यापारियों की शीर्ष संस्था कैट की चिंता


कोलकाता। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के नेशनल एग्जीक्यूटिव चेयरमैन सुभाष चंद्र अग्रवाला ने कहा कि देश की सबसे बड़ी व्यापारी संस्था कैट लंबे समय से पश्चिम बंगाल में ठोस आर्थिक और औद्योगिक सुधारों की आवश्यकता महसूस कर रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में प्रोत्साहन की कमी और स्पष्ट औद्योगिक नीतियों के अभाव के कारण बड़े औद्योगिक घराने लगातार राज्य से बाहर जा रहे हैं। उद्योग जगत में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जिससे निवेश प्रभावित हो रहा है।
अग्रवाला ने विशेष रूप से बिजली की बढ़ती लागत पर चिंता जताते हुए कहा कि उद्योगों की रीढ़ मानी जाने वाली बिजली की कीमतों को नियंत्रण में रखने में सरकार विफल रही है। इसके चलते उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ी है और प्रतिस्पर्धात्मकता घटी है।


उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में उद्योगों के लिए अधिकतम 24 एकड़ भूमि सीमा (लैंड सीलिंग) जैसी नीतियों ने बड़े निवेश को हतोत्साहित किया है। अन्य राज्यों में ऐसी कोई सीमा नहीं होने के कारण निवेशक वहां रुख कर रहे हैं।
दार्जिलिंग के चाय उद्योग का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जो उद्योग कभी वैश्विक स्तर पर अपनी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध था, वह अब समर्थन की कमी और उच्च वेतन संरचना के दबाव में कमजोर हो गया है।
अग्रवाला ने यह भी कहा कि राज्य में रोजगार के अवसरों पर दबाव बढ़ा है और लोगों में निराशा का माहौल बन रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पश्चिम बंगाल को स्थिर, पारदर्शी और उद्योग समर्थक नीतियों की तत्काल आवश्यकता है, ताकि निवेश वापस आए और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकें।
उन्होंने अंत में कहा कि राज्य के लोग अब बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं और एक सकारात्मक, विकासोन्मुखी नीति ढांचे की मांग कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *