
आसनसोल। आसनसोल के रवींद्र भवन में आदिवासी समाज की एकजुटता और ताकत का प्रभावशाली प्रदर्शन उस समय देखने को मिला, जब भारत जाकात माझी पारगाना महल संगठन की ओर से जिला स्तरीय सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में आदिवासी समाज के विकास, अधिकारों की सुरक्षा और संगठन को सशक्त बनाने को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के पारंपरिक स्वागत के साथ हुई। इसके पश्चात आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार पेड़ पूजा और धर्मगुरु पूजा का आयोजन किया गया, जिसने समाज की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। वही इस दौरान झंडा फहराकर सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस पारंपरिक शुरुआत ने उपस्थित लोगों में गर्व और एकजुटता की भावना को और मजबूत किया। इस अवसर पर राज्य के मंत्री एवं आसनसोल उत्तर विधानसभा से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार मलय घटक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार आदिवासी समुदाय के सर्वांगीण विकास के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है। इन योजनाओं के माध्यम से सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में निरंतर प्रगति सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि आसनसोल उत्तर क्षेत्र में इन योजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है और वे स्वयं लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनकर समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं। सम्मेलन के दौरान शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक अधिकारों जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही संगठन को मजबूत करने और भविष्य की रणनीति तय करने पर भी विचार-विमर्श हुआ। जिला स्तर पर महल संगठन का पूर्ण गठन इस सम्मेलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही, जिससे संगठनात्मक ढांचे को और मजबूती मिली।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए आदिवासी समाज को साधने की कोशिशें तेज हो गई हैं। तृणमूल कांग्रेस इस वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत दिखाई दे रही है। मलय घटक ने अपने संबोधन में आश्वासन दिया कि राज्य सरकार आदिवासी समाज के उत्थान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में और अधिक कल्याणकारी योजनाएं लागू की जाएंगी। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।
कुल मिलाकर, रवींद्र भवन में आयोजित यह सम्मेलन केवल एक सामाजिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आदिवासी समाज की आवाज को सशक्त करने और उसकी राजनीतिक दिशा तय करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। इस आयोजन ने आसनसोल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
