
रानीगंज । पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल दिन-प्रतिदिन गर्माता जा रहा है। इसी बीच रानीगंज विधानसभा क्षेत्र के खांद्रा में आयोजित एक जनसभा के दौरान तृणमूल कांग्रेस प्रमुख एवं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी ही पार्टी के नेता को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए अनुशासन पर स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया। जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने जामुड़िया के निवर्तमान विधायक एवं तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी हरे राम सिंह का नाम लेते हुए उनके बेटे के व्यवहार पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अपने बेटे को लाल बत्ती लगी गाड़ी में घूमने से रोके, क्योंकि इस प्रकार की गतिविधियां जनता के बीच गलत संदेश देती हैं और किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। मुख्यमंत्री के इस सीधे और कड़े बयान से सभा स्थल पर मौजूद लोगों के बीच हलचल मच गई और यह मुद्दा तुरंत ही राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान केवल व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने के लिए एक स्पष्ट संकेत है। दरअसल,पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को ध्यान में रखते हुए तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व अपनी छवि को लेकर अत्यंत सतर्क नजर आ रहा है। पार्टी किसी भी प्रकार के विवाद या नकारात्मक संदेश से बचना चाहती है। मुख्यमंत्री का यह रुख दर्शाता है कि पार्टी में अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और किसी भी नेता या उसके परिवार की अनुचित गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, इस घटनाक्रम को लेकर विपक्ष को भी सरकार पर निशाना साधने का अवसर मिल गया है। जामुड़िया से भाजपा प्रत्याशी डॉ बिजन मुख़र्जी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का यह बयान तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक हालात और अनुशासनहीनता को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पहले से ही चिंताजनक है और अब सत्ताधारी दल के भीतर भी ऐसे उदाहरण सामने आ रहे हैं। समग्र रूप से देखा जाए तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का यह बयान केवल एक नेता को दी गई चेतावनी भर नहीं, बल्कि पूरी पार्टी के लिए एक सख्त संदेश है। इससे स्पष्ट होता है कि चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस अनुशासन, पारदर्शिता और साफ-सुथरी छवि के साथ जनता के बीच जाने की रणनीति पर काम कर रही है।
