
हावड़ा, 18 फरवरी । विवेकानंद विद्या विकास परिषद् द्वारा हावड़ा में आयोजित ‘संघशक्ति सम्मेलन (मातृ सम्मेलन)’ में मातृशक्ति की भूमिका, भारतीय सभ्यता और संस्कृति के संरक्षण तथा बच्चों में सकारात्मक संस्कारों के संचार पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, समाजसेवा और न्याय क्षेत्र से जुड़ी कई विशिष्ट हस्तियां उपस्थित रहीं।
परिषद की चेयरमैन भारती प्रसाद जाना, ट्रस्टी नरेन नाथ दास और राखी बनर्जी सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। मुख्य अतिथि के रूप में कलकत्ता उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस समाप्ति चटर्जी उपस्थित रहीं, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में मधुश्री संजीव साउ ने विचार व्यक्त किए। विशेष अतिथि के रूप में संस्कार भारती की अखिल भारतीय सचिव नीलांजना राय भी कार्यक्रम में मौजूद थीं।
मुख्य वक्ता मधुश्री साउ ने अपने संबोधन में कहा कि मां बच्चे की पहली गुरु होती है और एक अच्छे नागरिक के निर्माण की जिम्मेदारी मातृशक्ति पर ही निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति के प्रति गौरव का भाव, मातृशक्ति का सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मबोध जैसे गुण बच्चों में विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। महाभारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने नारी शक्ति को सर्वाधिक सक्षम बताया है इसलिए महिलाओं को स्वयं को कमजोर नहीं बल्कि सर्वशक्तिमान मानकर बच्चों को उसी अनुरूप शिक्षा देनी चाहिए। उन्होंने समाज में सकारात्मक सोच के प्रसार पर बल देते हुए कहा कि आचरण और व्यवहार से ही श्रेष्ठ संदेश समाज तक पहुंचता है।
मुख्य अतिथि जस्टिस समाप्ति चटर्जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि बचपन में उन्होंने अपने बुजुर्गों से भारतीय सभ्यता और संस्कृति के उच्च आदर्श सीखे। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति इतनी समृद्ध है कि जीवन के हर उच्च मूल्य का पाठ यहां मिलता है। जीवन की किसी भी समस्या का आध्यात्मिक समाधान भारत में ही संभव है। उन्होंने इसे गर्व का विषय बताते हुए कहा कि हम उस भारतभूमि में जन्मे हैं, जहां मां शारदा जैसी नारी शक्ति ने पूरे विश्व को महिला उत्थान का मार्ग दिखाया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मातृशक्ति ही समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है और सकारात्मक संस्कारों के माध्यम से ही भविष्य की सशक्त पीढ़ी तैयार की जा सकती है।
