
कोलकाता, 13 फरवरी । पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता पहचान दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया शुरू होने से पहले भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की पूर्ण पीठ शुक्रवार सुबह 11 बजे राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय, सभी जिला मजिस्ट्रेटों और जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर रही है।
शनिवार से मतदाताओं द्वारा सुनवाई के दौरान जमा किए गए पहचान दस्तावेजों की जांच का चरण शुरू होगा, जो 21 फरवरी तक चलेगा। प्रारूप मतदाता सूची पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई की विस्तारित समयसीमा भी शनिवार को समाप्त हो रही है।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईआर के लिए नियुक्त माइक्रो-ऑब्जर्वरों ने सुनवाई सत्रों में आयोग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों से विचलन के कई मामलों की ओर ध्यान दिलाया है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर केवल ईसीआई द्वारा सूचीबद्ध 13 मान्य दस्तावेजों के बजाय अन्य दस्तावेज भी स्वीकार किए गए।
बताया जा रहा है कि बैठक के एजेंडे में यह मुद्दा प्रमुख रूप से शामिल रहेगा। आयोग संबंधित अधिकारियों को एक बार फिर स्पष्ट निर्देश दे सकता है कि केवल निर्धारित 13 दस्तावेजों को ही वैध पहचान प्रमाण माना जाए। साथ ही, जिन निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) और सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) ने कथित रूप से गैर-सूचीबद्ध दस्तावेज स्वीकार किए हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।
बैठक में एक अन्य अहम विषय राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अस्थायी मतदान केंद्रों की अंतिम सूची को मंजूरी देना होगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने 78 आवासीय परिसरों की पहचान कर उनकी सूची नई दिल्ली स्थित आयोग मुख्यालय को भेज दी है।
इसके अलावा, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव कितने चरणों में कराए जाएं, इस पर भी चर्चा होने की संभावना है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने एक चरण में मतदान कराने का प्रस्ताव आयोग को भेजा है, हालांकि अंतिम निर्णय आयोग ही करेगा।
राज्य की अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद एक मार्च से ईसीआई की पूर्ण पीठ दो दिवसीय दौरे पर पश्चिम बंगाल आएगी और एसआईआर के बाद की स्थिति की समीक्षा करेगी। दौरे के तुरंत बाद विधानसभा चुनाव की तिथियों की घोषणा की उम्मीद है।
