
कोलकाता, 05 फ़रवरी । महंगाई भत्ता (डीए) से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार के कर्मचारियों के संयुक्त मंच और विपक्षी दलों ने स्वागत किया है। शीर्ष अदालत के इस आदेश को कर्मचारियों के लंबे संघर्ष की बड़ी सफलता बताया जा रहा है।
राज्य सरकार के कर्मचारियों के संयुक्त मंच के संयोजक भास्कर घोष ने कहा कि यह फैसला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ उनके लगातार आंदोलनों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को लंबे समय से उनका वैध हक़, यानी डीए, नहीं दिया जा रहा था।
भास्कर घोष के मुताबिक, “यह राज्य के सरकारी कर्मचारियों की जीत है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि पश्चिम बंगाल सरकार को अब बकाया डीए देना ही होगा। यह हमारे 11 सौ दिनों से अधिक चले आंदोलन का परिणाम है।”
उन्होंने इस लड़ाई में साथ देने वाले वकीलों, विभिन्न संगठनों, विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास भट्टाचार्य का आभार जताते हुए कहा कि राज्य सरकार को बिना किसी और देरी के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आदेश दिया कि ममता बनर्जी सरकार को राज्य सरकारी कर्मचारियों का 25 प्रतिशत बकाया डीए 31 मार्च तक चुकाना होगा। इसके साथ ही न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने शेष 75 प्रतिशत डीए पर फैसला लेने के लिए चार सदस्यीय समिति गठित करने का निर्देश दिया है। इसी पीठ ने अगस्त 2025 में इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
गौरतलब है कि इससे पहले 16 मई 2025 को शीर्ष अदालत ने अंतरिम आदेश में तीन महीने के भीतर 25 प्रतिशत डीए भुगतान का निर्देश दिया था। बाद में राज्य सरकार ने धन की कमी का हवाला देते हुए समय सीमा बढ़ाने की मांग की थी।
फैसले के बाद विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने राज्य सरकारी कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का यह दावा गलत साबित हो गया है कि डीए कर्मचारियों का अधिकार नहीं है।
उनके अनुसार, “देश की सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि डीए कोई अनुदान नहीं, बल्कि कर्मचारियों का वैध अधिकार है।”
केंद्रीय शिक्षा एवं पूर्वोत्तर विकास राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कर्मचारियों की एकता, धैर्य और दृढ़ संकल्प का परिणाम है।
वाम मोर्चे के वरिष्ठ नेता विकास भट्टाचार्य ने इसे राज्य सरकार के लिए बड़ा झटका बताया और कहा कि सरकार ने बेवजह समय और धन बर्बाद किया। उन्होंने मांग की कि अब बिना देरी के बकाया डीए जारी किया जाए।
वहीं प्रदेश कांग्रेस नेता आशुतोष चटर्जी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ममता बनर्जी सरकार के लिए सबक है और उसे अपनी गलती सुधारनी चाहिए।
दूसरी ओर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इसे राज्य सरकार की आंशिक जीत बताया। पार्टी प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को 100 प्रतिशत डीए देने का आदेश नहीं दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा और आवास योजना जैसी परियोजनाओं के लिए बकाया राशि जारी नहीं कर रही है, जिससे राज्य पर वित्तीय दबाव बना हुआ है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 से अब तक इस मामले में 18 बार सुनवाई टली। अप्रैल 2025 से राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए डीए मूल वेतन का 18 प्रतिशत निर्धारित है, जबकि केंद्रीय कर्मचारियों और राज्य कर्मचारियों के डीए के बीच लगभग 40 प्रतिशत का अंतर बना हुआ है।
