
कोलकाता। गंगा के पावन किनारे, ऐतिहासिक बाबू घाट पर इन दिनों एक ऐसा चमत्कार रच रहा है, जहां सेवा का भाव हृदय को छू लेता है। अवध समाज का सेवा शिविर गंगासागर यात्रियों के लिए न केवल आश्रय बना हुआ है, बल्कि प्रेम, सम्मान और आत्मीयता का जीवंत मंदिर। ‘निरंतर सेवा, निरंतर सम्मान’ का ध्येय वाक्य लेकर ये योद्धा दिन-रात जुटे हैं, जो तीर्थयात्रियों की थकान मिटाकर उनके चेहरे पर मुस्कान बिखेर रहे हैं। विशिष्ट अतिथियों का आगमन इस पवित्र यज्ञ को नई ऊर्जा दे रहा है, मानो भगवान कपिल मुनि स्वयं आशीर्वाद बरसा रहे हों। विशिष्ट अतिथियों ने बढ़ाया सेवा का मान शिविर में गणमान्य अतिथियों का तांता लगा है, जो सेवा की इस लहर में कूद पड़े। आज श्री मुन्ना सिंह जी के आगमन पर अवध समाज के चेयरमैन श्री तर्केश्वर दुबे जी, उपाध्यक्ष श्री तारक नाथ दुबे जी और शिविर संरक्षक श्री आशीष कुमार सिंह, प्रचार सचिव पंडित उमेश उमेशचंद्र तिवारी जी ने पुष्पगुच्छ भेंटकर उनका हृदयस्पर्शी अभिनंदन किया। यह दृश्य देखकर हर कोई भावुक हो गया—सेवा का यह संगम समाज को एकजुट कर रहा है।अजय सिंह की टीम ने दिखाई मानवता की अनोखी मिसालशिविर में उत्साह की लहर तब और उफान मार गई, जब सम्माननीय श्री अजय सिंह जी अपनी पूरी टीम संग सेवा में कूद पड़े। उन्होंने न केवल शिविर का अवलोकन किया, बल्कि हाथों में थाली थामकर भोजन परोसने लगे। थके-हारे यात्रियों को उनका साथ देखकर आंसू छलक पड़े। अवध समाज ने श्री अजय सिंह और उनकी टीम का हृदय से आभार जताया। इस मौके पर श्री अजय सिंह ने कहा, “भविष्य में भी अवध समाज के कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे—यह हमारा दृढ़ संकल्प है।”भक्ति-भोजन का दिव्य संगम, स्वयंसेवकों की निष्ठा अनघटभगवान कपिल मुनि के आशीर्वाद से चाय, नाश्ता, दोपहर और रात्रि भोजन की उत्तम व्यवस्था हो रही है। स्वयंसेवक दिन-रात जुटे हैं—कभी पैर दबाते, कभी पानी पिलाते, कभी भजन गाते। यह दृश्य भक्ति और सेवा का अनुपम संगम है।”सेवा ही हमारा संकल्प है, यही अवध समाज की असली पहचान। समाज के सहयोग से यह पुण्य कार्य चला रहे हैं।”

श्री तर्केश्वर दुबे, चेयरमैन, अवध समाजबाबू घाट पर यह सेवा यज्ञ न केवल तीर्थयात्रियों का मनोरथ पूर्ण कर रहा है, बल्कि पूरे समाज को एकता का संदेश दे रहा है। ऐसे संकल्प से भारत की आत्मा मजबूत हो रही है।
