
दुर्गापुर। मतदाता सूची में 2002 से नाम दर्ज होने और हालिया ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में भी नाम होने के बावजूद सुनवाई का नोटिस मिलने से 79 वर्षीय बुज़ुर्ग महिला भय और तनाव में बीमार पड़ गईं। यह घटना दुर्गापुर के कांकसा इलाके के मलानदिघी क्षेत्र की है, जिसे लेकर परिवार और स्थानीय लोगों में गहरी नाराज़गी है।
मलानदिघी के 221 नंबर बूथ की मतदाता पुष्पलता केश लंबे समय से इसी इलाके की स्थायी निवासी हैं। उनके पति शिशिर केश का कहना है कि उनकी पत्नी का नाम हर सूची में मौजूद है, फिर भी सुनवाई के लिए बुलाया गया। बुज़ुर्ग महिला पहले से अस्वस्थ हैं—पैरों में दर्द है और सुनने में भी परेशानी होती है। ऐसे में ठंड के मौसम में दूर जाकर सुनवाई में शामिल होना उनके लिए बेहद कठिन है। पुष्पलता केश ने बताया कि नोटिस मिलने के बाद से वह काफी डरी हुई हैं और दवाइयों के सहारे किसी तरह दिन काट रही हैं। परिवार समझ नहीं पा रहा कि आगे क्या किया जाए। बूथ लेवल एजेंट अनंतरूप बंद्योपाध्याय ने कहा कि यह समस्या सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। राज्य के कई हिस्सों में बीमार और बुज़ुर्ग मतदाताओं को इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी टीम जरूरतमंद लोगों की हर संभव मदद कर रही है। वहीं, इस मामले पर कांकसा के बीडीओ सौरभ गुप्ता ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों को सुनवाई के लिए बुलाया गया है, उनके नाम अंततः मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 2002 की सूची में नाम होने के बावजूद कुछ मामलों में दस्तावेज़ जमा नहीं थे, इसलिए सुनवाई जरूरी है। अगर किसी की उम्र अधिक है या वे आने में असमर्थ हैं, तो चुनाव आयोग की अगली गाइडलाइन के अनुसार समाधान किया जाएगा। उन्होंने लोगों से घबराने की जरूरत न होने की अपील की।
