
फूल के आकार का भव्य पंडाल बना आकर्षण, विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी की मौजूदगी में हुआ उद्घाटन; श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे खुले रहेंगे मंदिर के कपाट
आसनसोल। दशकों पुरानी धार्मिक परंपरा, मां दुर्गा के प्रति अटूट आस्था और आकर्षक साज-सज्जा के संगम के साथ आसनसोल के बास्टिन बाजार सर्वजननी दुर्गापूजा का आयोजन इस वर्ष भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वर्ष 1952 में शुरू हुई इस पूजा ने समय के साथ अपनी अलग पहचान बनाई है। इस बार फूल के आकार में तैयार किया गया आकर्षक पंडाल, मंदिर के खुले कपाट और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन को खास बना रहे हैं। पूजा के उद्घाटन समारोह में आसनसोल उत्तर के विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी की उपस्थिति रही। बास्टिन बाजार की दुर्गापूजा स्थानीय लोगों के लिए केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की पुरानी परंपरा, सामुदायिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। हर वर्ष पूजा के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वहीं, पंडाल की सजावट और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां त्योहार के उत्साह को बढ़ाती हैं। इस बार भी पूजा परिसर को आकर्षक रूप दिया गया है, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं और दर्शकों को एक अलग अनुभव मिलने की उम्मीद है। बास्टिन बाजार सर्वजननी दुर्गापूजा की शुरुआत वर्ष 1952 में हुई थी। तब से लगातार चली आ रही यह परंपरा आज आसनसोल की पुरानी दुर्गापूजाओं में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। समय के साथ शहर का स्वरूप बदला, आबादी बढ़ी और पूजा आयोजनों के तरीके में भी परिवर्तन आया, लेकिन बास्टिन बाजार की पूजा से जुड़ी धार्मिक आस्था आज भी कायम है। बंगाल में दुर्गापूजा धार्मिक अनुष्ठान के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। इस पर्व के दौरान परिवारों और पड़ोसियों के बीच मेलजोल बढ़ता है तथा विभिन्न समुदायों के लोग उत्सव में भाग लेते हैं। बास्टिन बाजार की पूजा भी इसी परंपरा को आगे बढ़ा रही है। यहां की पुरानी विरासत और वर्तमान आयोजन की भव्यता का मेल इसे विशेष बनाता है। स्थानीय लोगों के लिए इस पूजा का ऐतिहासिक महत्व भी कम नहीं है। कई दशकों से चली आ रही परंपरा के कारण यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ गया है। हर वर्ष पूजा के आगमन के साथ लोगों में उत्साह बढ़ने लगता है और पंडाल की सजावट से लेकर मां दुर्गा के दर्शन तक, प्रत्येक गतिविधि के प्रति श्रद्धालुओं की विशेष रुचि रहती है।इस वर्ष बास्टिन बाजार की दुर्गापूजा में फूल के आकार में तैयार किया गया पंडाल विशेष आकर्षण का केंद्र है। पंडाल की अनूठी बनावट इसे आसपास के अन्य पूजा आयोजनों से अलग पहचान देती है। सजावट में कलात्मकता और पारंपरिक पूजा के वातावरण का ध्यान रखा गया है। दुर्गापूजा के दौरान पंडाल निर्माण समितियों के लिए अपनी कल्पनाशीलता और कलात्मक कौशल दिखाने का अवसर होता है। कहीं मंदिरों की स्थापत्य शैली को आधार बनाया जाता है, तो कहीं प्रकृति, लोककला और सामाजिक संदेशों को पंडाल के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। बास्टिन बाजार में फूल के आकार की संरचना इसी रचनात्मक परंपरा का उदाहरण है। पंडाल की सजावट के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा के दर्शन और पूजा-अर्चना का वातावरण श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। आयोजकों की कोशिश है कि पुरानी पूजा की गरिमा बनाए रखते हुए इस वर्ष के आयोजन को भी यादगार बनाया जाए। इस वर्ष बास्टिन बाजार की दुर्गापूजा मंदिर के कपाट खुले रहने की व्यवस्था को लेकर भी चर्चा में है। आयोजकों से मिली जानकारी के अनुसार, पहले विवाद के कारण मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे। इससे श्रद्धालुओं को दर्शन करने में परेशानी होने की बात सामने आई थी। आयोजकों का दावा है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद मंदिर के कपाट दोबारा खोल दिए गए। उनके अनुसार, विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी की पहल के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे दर्शन की व्यवस्था की गई है। इससे भक्त अपनी सुविधानुसार किसी भी समय मंदिर पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकते हैं। मंदिर के कपाट खुले रहने की व्यवस्था को स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।धार्मिक स्थलों पर दर्शन की सुविधा भक्तों की आस्था से जुड़ा विषय होती है। ऐसे में चौबीसों घंटे मंदिर खुला रहने से श्रद्धालुओं को अपनी सुविधा के अनुसार पूजा करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, मंदिर के कपाट पहले बंद किए जाने और बाद में खोले जाने से जुड़े घटनाक्रम के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस मामले में आयोजकों की ओर से दी गई जानकारी को उनके दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। पूजा के उद्घाटन अवसर पर धार्मिक माहौल के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। इन प्रस्तुतियों ने समारोह को उत्सवी रंग दिया। दुर्गापूजा के दौरान ऐसे कार्यक्रम स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक गतिविधियों को मंच देने के साथ लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं। उद्घाटन समारोह में विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी की उपस्थिति रही। इस अवसर पर पूजा की परंपरा और आयोजन की विशेषताओं को लेकर उत्साह देखने को मिला। हालांकि, कार्यक्रम में शामिल कलाकारों और प्रस्तुतियों के संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। बंगाल की दुर्गापूजा में धार्मिक आस्था के साथ संगीत, कला और सांस्कृतिक परंपराओं का विशेष महत्व है। बास्टिन बाजार का आयोजन भी इसी परंपरा का हिस्सा है, जहां पूजा के माध्यम से पुरानी विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी को उससे जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।बास्टिन बाजार सर्वजननी दुर्गापूजा की खासियत इसके लंबे इतिहास और हर वर्ष बदलते आयोजन स्वरूप में दिखाई देती है। वर्ष 1952 से चली आ रही परंपरा ने इसे स्थानीय समाज के जीवन से जोड़ रखा है। इस बार फूल के आकार का पंडाल, मंदिर में दर्शन की व्यवस्था और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन को विशेष बना रहे हैं। आसनसोल जैसे औद्योगिक शहर में पुरानी दुर्गापूजाएं केवल धार्मिक आयोजनों के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय इतिहास और सामाजिक जीवन की धरोहर के रूप में भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसी पूजा समितियां वर्षों से चली आ रही परंपराओं को जीवित रखने के साथ त्योहार की रौनक को भी आगे बढ़ाती हैं। बास्टिन बाजार सर्वजननी दुर्गापूजा का इस वर्ष का आयोजन इसी विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास है। मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा, आकर्षक पंडाल और सांस्कृतिक गतिविधियों के बीच यह पूजा एक बार फिर स्थानीय लोगों के लिए उत्सव और आस्था का केंद्र बनी हुई है।
