विश्व में भारत दूसरा देश हाइड्रोजन ट्रेन बनाने में

संघमित्रा सक्सेना:- विश्व में भारत फिर से नया इतिहास बनाई हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं, हाइड्रोजन ट्रेन के बारे में। हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई है। यह ट्रेन हरियाणा के जींद रेल स्टेशन से सोनीपत तक चलेगी। इस दौरान हाइड्रोजन ट्रेन कुल 89 किमी यात्रा करेगी।

क्या हैं हाइड्रोजन ट्रेन?
हाइड्रोजन ट्रेन में हाइड्रोजन को फ्यूल की तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। दरअसल हाइड्रोजन फ्यूल इलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रिया के दौरान फ्यूल सेल के अंदर पावर जेनरेट करता है। हाइड्रोजन और ऑक्सीजन जब एक दूसरे के संस्पर्श में आती है तब इलेक्ट्रिसिटी, वाटर वेपर और हिट जनरेट करती है। सबसे फायदेमंद बात यहां है कि हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की इलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रिया से किसी भी प्रकार के नुकसानदायक गैस नहीं निकलती है। इस दिशा में देखा जाए तो परिवेश में ग्लोबल वार्मिंग की समस्या जिस तरह से बढ़ रही है, उन पर नियंत्रण के लिए ऐसे इको फ्रेंडली पब्लिक ट्रांसपोर्ट काबिले तारीफ है।

हाइड्रोजन ट्रेन की इतिहास?
विश्व में जर्मनी 2018 में हाइड्रोजन ट्रेन बनाकर सारे दुनिया में पर्यावरण की रक्षा हेतु एक प्रशंसनीय कदम उठाई थी। जर्मनी पहला देश है जिन्होंने हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। जर्मनी के बाद भारत हाइड्रोजन ट्रेन बनाने में दूसरी देश बन चुकी है।

भारत दूसरा देश, जिन्होंने हाइड्रोजन ट्रेन बनाया
आपको बता दे कि भारत में बने पहली हाइड्रोजन ट्रेन का रूट हरियाणा के जींद से लेकर सोनीपत तक है। कुल मिलाकर बड़ा स्टेशन में इस रूट को डिवाइड किया गया है। सूत्रों के मुताबिक हाइड्रोजन ट्रेनकुल मिलाकर ढाई हजार के आसपास यात्री ले सकते हैं।
हाइड्रोजन ट्रेन की खासियत
रफ्तार, 110 किलोमीटर प्रति घंटा लेकिन 75 किलोमीटर प्रति घंटा का अनुमोदन मिला है।
हाइड्रोजन ट्रेन का टिकट मूल्य न्यूनतम ₹5 है और सर्वोच्च ₹25 है।
यहां ट्रेन जींद जंक्शन गोहाना जंक्शन और सोनीपत जंक्शन को जोड़ेगी।
हाइड्रोजन ट्रेन ग्रीन फ्यूल चलती है।

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