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"नीतीश का अग्निपथ पर तकरार तो रायसीना हिल पर प्यार" - Kolkata Saransh News

“नीतीश का अग्निपथ पर तकरार तो रायसीना हिल पर प्यार”

क्रांति कुमार पाठक
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बिहार में एक लंबे अर्से से भाजपा -जदयू के रिश्तों को लेकर हमेशा असमंजस की स्थिति ही बनी रहती है। कभी दोनों ही दलों में तकरार इतनी बढ़ जाती है कि लगता है, अब गठबंधन नहीं चलने वाली है। वहीं कुछ समय बीतने पर भाजपा शीर्ष नेतृत्व के प्रयासों से हालात एक दम से ही सामान्य हो जाते हैं। हालिया प्रकरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अति महत्वाकांक्षी योजना अग्निपथ को लेकर है, जिसमें जदयू ने अग्निपथ के औचित्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसको लेकर भाजपा और जदयू के बीच मनमुटाव काफी बढ़ गई। राज्य के भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री के खिलाफ अपनी आलोचनाओं के बाण तेज करते हुए ‘खराब’ पुलिस बंदोबस्त के उन्हें दोषी ठहराया है। गौरतलब है कि प्रदर्शनकारियों ने रेल, बस के साथ ही भाजपा नेताओं के घरों को भी निशाना बनाया। वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस पर रहस्यमई खामोशी अख्तियार कर रखी। जिसकी वजह से दोनों पार्टियों में तनातनी की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू को राजग गठबंधन द्वारा प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन नीतीश कुमार को गया तो तुरंत समर्थन देकर नीतीश कुमार ने स्थानीय उठा-पटक को शांत कर दिया।
दरअसल बिहार में भाजपा -जदयू के साथ गठबंधन सरकार है, इसके बावजूद दोनों पार्टियों में तनातनी है, विशेषकर इसलिए कि जदयू के भाजपा से कम विधायक होने के बावजूद नीतीश कुमार ने जातिगत गणना, इतिहास पुनर्लेखन व जनसंख्या नियंत्रण पर भाजपा के घोषित एजैंडा से अलग दृष्टिकोण अपनाया है और अब अग्निपथ पर नीतीश की खामोशी बेचैन किए हुए था।
वाकई सरकार गठन के बाद से ही भाजपा और जदयू के संबंध सामान्य नहीं रहे। कुछ दिन की शांति के बाद कुछ न कुछ ऐसा हो जाता है कि फिर दोनों दलों के बीच वाकयुद्ध शुरू हो जाता है। लगने लगता है कि शायद बेमेल विचार हो गया है और अब गठबंधन टूटने में देर नहीं। वहीं विपक्ष में खाली बैठे दल अपने भविष्य को लेकर आशान्वित होने लगते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उनके लिए नतीजा वही ढाक के तीन पात। अभी अग्निपथ योजना को लेकर दोनों दलों के बीच विरोध खुलकर सामने आ गया। अग्निपथ का विरोध सबसे ज्यादा बिहार में ही हुआ। ट्रेनें जलाई गई, स्टेशन फूंके गए, बसों व अन्य वाहनों को भी निशाना बनाया गया और तो और भाजपा कार्यालय और भाजपा नेताओं के घर पर भी कहर टूटा। वहीं प्रशासन मूकदर्शक सा बना रहा। इधर भाजपा के साथ सत्ता में साथी जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह भी अग्निपथ योजना के विरोध में खड़े हो गए। उसके बाद जदयू के बाकी नेता भी उनके सुर में सुर मिलाने लगे। भाजपा की स्थिति काफी असहज हो गई थी। किंतु शीर्ष स्तर से उन पर कोई बयान न देने का दबाव था, इसलिए कोई कोई बोल भी नहीं सकता था। हालांकि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भी बिहार के हालात से परेशान दिख रहा था। फिर स्थानीय भाजपा नेताओं ने भी पलटवार करते हुए अग्निपथ योजना की खूबियां गिनाते हुए विधि व्यवस्था पर सवाल उठाने लगे।
भाजपा की तरफ से मोर्चा संभाला प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस गैर जिम्मेदार बनी रही, अगर प्रशासन चाहता तो उपद्रव पर नियंत्रण पाया जा सकता था। इस पर विरोध में उतरे ललन सिंह ने संजय जायसवाल के बारे में कहा कि वह मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। नीतीश गुड गवर्नेंस के लिए ही जाने जाते हैं। मामला बढ़ता देख मुख्यमंत्री आवास ने इसे तुल न देने की पहल की। इसी बीच राष्ट्रपति चुनाव के लिए राजग प्रत्याशी की घोषणा ने इस पर पानी डालने का काम किया। द्रौपदी मुर्मू को समर्थन के लिए नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार को स्वयं फोन कर समर्थन मांगा। इस पर नीतीश कुमार द्वारा तुरंत समर्थन की घोषणा कर दी और मामले का पटाक्षेप समझा गया और समर्थन को लेकर अलग अलग अटकलें लगने लगीं। यह माना गया कि नीतीश कुमार को महिलाओं का समर्थन प्राप्त है, इसलिए महिला आदिवासी प्रत्याशी का विरोध वह नहीं कर सकते थे। इसके विपरीत कुछ लोगों का मानना है कि नीतीश कुमार के लिए यह सब मायने नहीं रखता। पिछले राष्ट्रपति चुनाव में महागठबंधन में रहने के बावजूद उन्होंने बिहार की दलित महिला प्रत्याशी मीरा कुमार को समर्थन न देकर राजग गठबंधन प्रत्याशी राम नाथ कोविंद को दिया था। इसलिए इस बार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन जाहिर कर रहा है कि फिलहाल नीतीश कुमार राजग गठबंधन नहीं छोड़ने वाले हैं। दरअसल सियासी गणित ही कुछ ऐसा है कि सत्ता में बने रहने के लिए दोनों पार्टियां एक दूसरे को बर्दाश्त करने को मजबूर हैं। 243 सदस्यों की विधानसभा में भाजपा के 77, राजद के 75 व जदयू के 45 विधायक हैं और फिर भी मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं, क्योंकि राजनीति की बिसात ही कुछ ऐसी है। बहरहाल मोदी और नीतीश की वार्ता के बाद अब सब कुछ ठीक वाले हालात समझे जा रहे हैं। इस तरह कभी तकरार तो कभी प्यार वाले हालात में झूल रहे भाजपा -जदयू के रिश्तों को लेकर माथापच्ची करते हुए प्रदेश की जनता भी शांत बैठकर नजारा देख रही है।

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