कोलकाता, 13 जुलाई । 2021 के विधानसभा चुनाव का परिणाम दो मई को आया और उसके बाद से लगातार 10 दिनों तक राज्य भर में बर्बर हिंसा की यादें बंगाल के लोगों के जेहन से अभी भी नहीं मिटी हैं। उसके पहले 2018 के पंचायत चुनाव के बाद ही हफ्तों तक विपक्ष के लोगों के घरों दफ्तरों में हमले तोड़फोड़ आगजनी दुष्कर्म आदि की घटनाएं होती रही थीं। इस बार अब पंचायत चुनाव बीत गए हैं और ऐसी घटनाएं ना हों, इसके लिए कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्रीय बलों की तैनाती आगामी 10 दिनों तक राज्य में रखने का आदेश पहले ही दिया था। उसी के मुताबिक 11 जुलाई को मतगणना शुरू हुई थी और 12 जुलाई की रात खत्म हो गई है। बावजूद इसके आज 13 जुलाई गुरुवार को भी राज्य के कई हिस्सों में केंद्रीय बलों की गस्ती हो रही है। खासतौर पर मुर्शिदाबाद जहां सबसे अधिक हिंसा हुई है वहां सुबह से ही शमशेरगंज इलाके में राज्य पुलिस के साथ मिलकर सेंट्रल फोर्स के जवानों ने गश्ती शुरू की है जो इलाके में शांति सुनिश्चित करने में मददगार हो रहा है। इसी तरह से देवीदासपुर, सिउली, भवानीबाटी सहित उत्तर बंगाल के कूबिहार, दक्षिण 24 परगना के भांगड़, बासंती, कैनिंग सहित अन्य इलाकों में केंद्रीय बलों के जवान रूट मार्च कर रहे हैं ताकि शांति व्यवस्था बरकरार रहे। मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज, शमशेरगंज, सूती, फरक्का, सागरदिघी सहित पूरे जंगीपुर इलाके में 21 कंपनी केंद्रीय बलों की तैनाती अभी भी की गई है। खास बात यह है कि चुनाव वाले दिन इन क्षेत्रों में केवल 15 कंपनी केंद्रीय बलों की तैनाती थी।
उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद मतगणना वाले दिन भी गोलीबारी में आईएसएफ के तीन कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतारा गया है।
