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विहंगम योग संत समाज के सद्गुरु एवं संत प्रवर को आश्रम ने दी भावभीनी विदाई - Kolkata Saransh News

विहंगम योग संत समाज के सद्गुरु एवं संत प्रवर को आश्रम ने दी भावभीनी विदाई

 

आसनसोल। ब्रह्मविद्या विहंगम योग संस्थान के आचार्य सद्गुरु श्री स्वतंत्र देव जी महाराज एवं संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज को निंघा आश्रम संत समाज के भक्तों ने बुधवार को भावभीनी विदाई दी। इस दौरान आश्रम परिसर में सैकड़ों लोग उपस्थित हुए। सभी लोगों ने सद्गुरु एवं संत प्रवर जी का आशीर्वाद गया। सद्गुरु ने सभी को प्रसाद प्रदान किया। मालूम हो कि विहंगम योग का कार्यक्रम बीते 22 एवं 23 अप्रैल को महर्षि सद्गुरु सदाफल देव आश्रम निंघा में आयोजित हुआ। जिसमें 23 अप्रैल को 551 कुंडीय विश्व शांति वैदिक महायज्ञ सफलतापूर्वक आयोजित हुआ। जिसमें हजारों की संख्या में भक्त पहुंचे। दोनों दिन लगातार भंडारा आयोजित हुआ। जिसमें संत समाज सहित आसपास के हजारों लोग शामिल हुए। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए मुख्य रूप से आश्रम के अध्यक्ष पीएन सिंह, महाप्रबंधक वीके सिंह, राष्ट्रीय प्रचारक सह कार्यक्रम के प्रचारक आलोक साहा एवं रीता साहा, सहायक कोषाध्यक्ष भोला सिंह, सौरव बर्नवाल, कार्यक्रम के संयोजक उमेश सिंह सहसंयोजक उमेश सोनी, संजीत मोदी, मुख्य व्यवस्था में जेपी मिश्रा, भोजन व्यवस्था के प्रमुख डॉ सुरेश महतो, शंकर पासवान, यज्ञ व्यवस्था के प्रमुख गणेश बर्नवाल एवं आदित्य विश्वकर्मा, सुप्रियो मंडल, सुरक्षा व्यवस्था के पंकज वर्णवाल एवं रामू हांसदा, आचार्य निवास व्यवस्था के सीमा सिंह ज्योति प्रसाद, आकाश सिंह, विकास सिंह, आश्रम के पुरोहित कृष्णा कुमार, महिला विभाग की प्रमुख सुशीला देवी, जल व्यवस्था के अशोक सिंह इसके अलावे क्षेत्र में विशेष रुप से प्रचार के लिए विहंगम योग संत समाज के अंतर्राष्ट्रीय प्रचारक संत श्री किशन लाल शर्मा, सत्यरमन सिन्हा, मनोज सिन्हा का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर संत श्री कृष्ण लाल शर्मा जीने बताया कि 23 अप्रैल को आयोजित कार्यक्रम पूर्णता सफल हुआ। आज स्वामी जी एवं संत प्रवर जी की विदाई हुई। यहां से सद्गुरु एवं संत प्रवर का कोलकाता के श्रीरामपुर आश्रम गए। कार्यक्रम में मुख्य रूप से योग साधना सिखाई गई। विहंगम योग की साधना के लाभ बतलाए गए। विहंगम योग की साधना करने से से सुगर, बीपी, हृदय रोग, तनाव से होने वाली बीमारियां, नींद की समस्या नियंत्रित करती है। विहंगम योग की साधना पर अनेकों देशों में वैज्ञानिक शोध हुए। यह साधना हमारे जीवन को बदल देती है। विहंगम योग एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है। 35 से अधिक देशों में विहंगम योग का प्रचार प्रसार तीव्र गति से चल रहा है। हजारों लोग विहंगम योग से जुड़कर अपने अध्यात्मिक एवं भौतिक विकास कर रहे हैं। विहंगम योग संस्था यूएनओ पीस एंड हैबिटेट जुड़ी हुई है। हमलोग सामाजिक और अध्यात्मिक सहित समाज सेवा के लिए ब्लड डोनेशन कैंप, हेल्थ कैंप, वृक्षारोपण, वृद्धा आश्रम, गरीबों को वस्त्र भोजन उपलब्ध करवाना, प्राकृतिक आपदा के समय लोगों की सहायता, मुफ्त चिकित्सा व्यवस्था, गौशाला में वृद्ध एवं लाचार पशुओं की सेवा सहित अनेकों सामाजिक व्यवस्था कर रही है। खासतौर पर आदिवासी क्षेत्रों में लोगों को घर बनाकर देना, सुविधा देना, वस्त्र व अनाज देना ऐसे अनेकों कार्य विहंगम संस्था के द्वारा चल रहे हैं। अध्यात्मिक सहित हर क्षेत्र में अपनीअध्यात्मिक सहित हर क्षेत्र में अपने विकास के लिए सभी को विहंगम योग से जुड़ना चाहिए।

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