
कोलकाता । मुनि रविन्द्र विजय महाराज एवं मुनि महेन्द्र विजय महाराज के सानिध्य में श्री वर्द्धमान जैन संघ में आस्था, भक्ति भावना से समाजसेवी माणक चन्द – सम्पत देवी, विनोद – शशि, योगेश – आशा, महावीर – सुनीता, गौरव, वैभव, समकित एवं परिवार के सदस्यों तथा श्रावक – श्राविकाओं ने श्री सिद्धचक्र महापूजन किया ।

मुनि रविन्द्र विजय महाराज ने बताया जैन धर्म में श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान एक अत्यंत महिमाशाली, पाप-निवारक और आध्यात्मिक शुद्धि का अनुष्ठान है । सिद्धचक्र आराधना सिद्ध परमेष्ठी (कर्मों से मुक्त आत्माओं) की पूजा और ध्यान के लिए की जाती है । यह विधान सामान्य रूप से अष्टाह्निका पर्व के दौरान 8 दिनों तक विधि-विधान के साथ किया जाता है । सिद्धों के अनंत गुणों (अनंत ज्ञान, अनंत दर्शन, अनंत वीर्य, और अव्याबाध सुख) की आराधना की जाती है । इस विधान की आराधना से आत्मीय सुख मिलता है, आत्मबल बढ़ता है, जीवन के कष्ट व ज्ञात-अज्ञात पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है ।

श्री वर्धमान जैन संघ के ट्रस्टी कमल सिंह रामपुरिया, विजय चन्द बैद, रतनचंद बांगानी, महेन्द्र सुराणा, दिलीप दुगड़, विनीत रामपुरिया, नरेन्द्र बांठिया एवं चातुर्मास प्रबंध समिति के संयोजक माणकचन्द सेठिया, शांतिलाल रामपुरिया, मोहनलाल कोचर, देवेन्द्र कोचर एवं कार्यकर्ता सक्रिय रहे ।
