
72वें दुर्गोत्सव में महिला हिंसा, दहेज उत्पीड़न और यौन अपराधों के खिलाफ अनूठी पहल, चित्रकलाओं और संदेशों के जरिए सामाजिक कुरीतियों पर किया प्रहार
आसनसोल । मां दुर्गा को शक्ति, साहस और नारी सम्मान का प्रतीक माना जाता है। उनकी आराधना का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है, जब समाज की प्रत्येक महिला को सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकार मिलें। इसी विचार को केंद्र में रखकर रामबंध सार्वजनिक दुर्गोत्सव पूजा समिति के तत्वावधान में आयोजित रामबंध फ्रेंड्स क्लब के 72वें दुर्गोत्सव में इस वर्ष महिला सुरक्षा और नारी सम्मान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। पूजा पंडाल की कलात्मक सजावट, चित्रकलाओं और प्रभावशाली संदेशों के माध्यम से महिलाओं के खिलाफ हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन अपराध तथा सामाजिक भेदभाव जैसे गंभीर मुद्दों को उठाकर लोगों को आत्ममंथन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। रामबंध फ्रेंड्स क्लब ने अपने 72वें दुर्गोत्सव को केवल धार्मिक अनुष्ठान और उत्सव तक सीमित न रखकर इसे सामाजिक जागरूकता का माध्यम बनाने का प्रयास किया है। पंडाल की विषयवस्तु के जरिए यह बताने की कोशिश की गई है कि मां दुर्गा की पूजा करने वाले समाज को महिलाओं के प्रति अपने व्यवहार और दृष्टिकोण पर भी विचार करना चाहिए। एक ओर पंडाल में मां दुर्गा की आराधना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है, वहीं दूसरी ओर वहां प्रदर्शित चित्रकलाएं और संदेश लोगों का ध्यान सामाजिक कुरीतियों की ओर आकर्षित कर रहे हैं।
पंडाल में विभिन्न चित्रों और संदेशों के माध्यम से महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार, घरेलू हिंसा, दहेज के लिए प्रताड़ना और उनके अधिकारों के हनन जैसे विषयों को सामने लाया गया है। बंगला भाषा में लिखे गए संदेशों के जरिए सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध आवाज उठाने के साथ लोगों को महिलाओं के प्रति संवेदनशील बनने का आह्वान किया गया है। इन संदेशों का उद्देश्य केवल समस्याओं को प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि समाज को यह समझाना भी है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाला अत्याचार किसी एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज की संवेदनशीलता और नैतिकता पर सवाल खड़ा करता है। दुर्गोत्सव के दौरान मां दुर्गा को शक्ति स्वरूपा के रूप में पूजने की परंपरा रही है। ऐसे में महिलाओं के प्रति हिंसा, भेदभाव और अपमान की घटनाएं समाज के सामने एक गंभीर विरोधाभास प्रस्तुत करती हैं। रामबंध फ्रेंड्स क्लब की इस वर्ष की पहल इसी विरोधाभास को उजागर करती है। पंडाल के माध्यम से संदेश दिया गया है कि नारी शक्ति की आराधना का अर्थ केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि महिलाओं के सम्मान, स्वतंत्रता और सुरक्षा को दैनिक जीवन में भी महत्व दिया जाना चाहिए। दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीति आज भी कई परिवारों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। वहीं, महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा और यौन अपराध उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए केवल कानून और प्रशासन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए परिवार, समाज और प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। क्लब की सामाजिक विषयवस्तु इसी सोच को मजबूत करने का प्रयास करती है। रामबंध फ्रेंड्स क्लब की सदस्य शताब्दी मुखर्जी ने बताया कि इस वर्ष पूजा की विषयवस्तु के माध्यम से महिलाओं के प्रति समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा नारी शक्ति का प्रतीक हैं। उनकी आराधना हमें महिलाओं के सम्मान, अधिकारों और सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराती है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा और अत्याचार किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकते। इसके विरुद्ध समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने बताया कि महिलाओं को केवल परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित मानने के बजाय समाज के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करना आवश्यक है। महिलाएं शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सेवा और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और क्षमता का परिचय दे रही हैं। इसलिए उनके लिए ऐसा वातावरण तैयार करना जरूरी है, जहां वे बिना किसी भय, भेदभाव और दबाव के अपने जीवन के फैसले ले सकें।पूजा पंडाल में प्रदर्शित सामाजिक संदेश श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी विचार करने का अवसर दे रहे हैं। मां दुर्गा के दर्शन के लिए पहुंचने वाले लोग चित्रकलाओं और संदेशों के माध्यम से महिला सुरक्षा तथा नारी सम्मान से जुड़े मुद्दों को समझने का प्रयास कर रहे हैं। इस तरह पूजा पंडाल को सामाजिक चेतना के एक मंच के रूप में प्रस्तुत किया गया है। दुर्गापूजा बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दौरान विभिन्न पूजा समितियां अपनी कलात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक विषयों को सामने लाने का प्रयास करती हैं। रामबंध फ्रेंड्स क्लब ने भी अपनी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महिला सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय को दुर्गोत्सव की मुख्य अवधारणा में शामिल किया है। रामबंध फ्रेंड्स क्लब का 72वां दुर्गोत्सव इस संदेश को प्रमुखता से सामने लाता है कि महिलाओं के प्रति सम्मान केवल भाषणों, नारों और उत्सवों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसकी वास्तविक अभिव्यक्ति परिवार और समाज के व्यवहार में दिखाई देनी चाहिए। बेटियों को समान अवसर देना, महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करना, दहेज प्रथा का विरोध करना और हिंसा की घटनाओं के विरुद्ध आवाज उठाना सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। क्लब की इस पहल के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि मां दुर्गा की आराधना तभी सार्थक होगी, जब समाज महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और भेदभावमुक्त वातावरण तैयार करने के संकल्प को व्यवहार में उतारेगा। धार्मिक आस्था और सामाजिक चेतना का यह संगम दुर्गोत्सव को एक व्यापक सामाजिक उद्देश्य से जोड़ता है।
