राष्ट्रीय कवि संगम द्वारा श्रद्धेय जगदीश मित्तल जी को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

डॉ. अशोक बत्रा बने राष्ट्रीय कवि संगम के नए कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष

हनुमान चालीसा पाठ एवं दो मिनट के मौन के साथ दिवंगत आत्मा को दी गई पुष्पांजलि

कोलकाता, 14 सितंबर: राष्ट्रीय कवि संगम (पश्चिम बंगाल) द्वारा संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूज्य मार्गदर्शक एवं वरिष्ठ साहित्य-सेवी श्रद्धेय श्री जगदीश मित्तल जी (‘बाबूजी’) की पावन स्मृति में बड़ाबाज़ार लाइब्रेरी के सभागार में एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों एवं रचनाकारों द्वारा स्व. मित्तल जी के चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। तत्पश्चात उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों एवं साहित्यकारों ने दिवंगत आत्मा की शांति हेतु दो मिनट का मौन रखा तथा संपूर्ण सदन ने एक स्वर में श्री हनुमान चालीसा का सस्वर पाठ किया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्री ब्रजेश कुमार त्रिपाठी (अध्यक्ष), श्री के.के. बंसल (मुख्य अतिथि), डॉ. राहुल अवस्थी (विशिष्ट अतिथि) , डॉ. गिरिधर राय (प्रांतीय अध्यक्ष), जय गोपाल गुप्ता और विनय कुमार शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही।

अतिथियों के विचार एवं महत्वपूर्ण घोषणा:
श्री ब्रजेश कुमार त्रिपाठी (सीवीओ, सीआईएल): “जो लोग निजी स्वार्थ से उठकर परमार्थ में स्वयं को समर्पित कर देते हैं, वही सच्चे परमार्थी कहलाते हैं। मित्तल जी ने परिवार को दुनिया मानने की बजाय पूरी दुनिया को अपना परिवार माना।”

श्री के.के. बंसल (मुख्य अतिथि): “मित्तल जी साहित्य और संस्कृति के सच्चे संवाहक थे। उनका संपूर्ण जीवन सादगी, निष्ठा और राष्ट्र-समर्पण का प्रतीक रहा। उनका देहावसान साहित्यिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।”

डॉ. राहुल अवस्थी (विशिष्ट अतिथि): “सुबह होते न होते रोशनी की झील हो जाना / उजाले के सफ़र का शाम को कन्दील हो जाना / हमारी ज़िंदगी शाहेजहाँ का हुक़्म होना है / हमारी मौत है उस हुक़्म की तामील हो जाना।”

डॉ. गिरिधर राय (प्रांतीय अध्यक्ष): “परमार्थी और पूज्य मार्गदर्शक श्री जगदीश मित्तल जी के जाने से जो शून्य उत्पन्न हुआ है, उसकी भरपाई कर पाना संभव नहीं है। किंतु संगठन के कार्यों को अनवरत आगे बढ़ाने हेतु डॉ. अशोक बत्रा जी को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया गया है।”

सत्र संचालन एवं काव्यांजलि:
श्रद्धांजलि सभा दो प्रमुख सत्रों में संपन्न हुई। प्रथम सत्र (भावांजलि) का कुशल संचालन डॉ. गिरिधर राय ने किया, जिसमें वक्ताओं ने स्व. मित्तल जी के जीवन-मूल्यों व साहित्यिक अवदानों को स्मरण किया।
द्वितीय सत्र (काव्यांजलि) का संचालन प्रांतीय मंत्री देवेश मिश्र ने किया। इसमें हिमाद्रि मिश्र, नीलम झा, विजय शर्मा, प्रदीप कुमार धानुक, रंजना झा, अश्विनी कुमार झा, नीलम मिश्र, नागेन्द्र कुमार दुबे, ओमप्रकाश चौबे, मानस कुमार, राम नारायण झा, शिव शंकर सिंह, अयूब वारसी, आलोक चौधरी, तारकेश राय एवं विनय कुमार शर्मा ने अपनी मार्मिक काव्य-रचनाओं के माध्यम से काव्यांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम को सफल बनाने में हिमाद्रि मिश्र, विजय शर्मा आदि की सराहनीय भूमिका रही। अंत में देवेश मिश्र द्वारा धन्यवाद ज्ञापन और सामूहिक शांति गीत के गायन के साथ सभा का समापन हुआ।

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