

कोलकाता । जैन धर्म के महापर्व पर्युषण (श्वेतांबर परंपरा) में कल्पसूत्र के वाचन के दौरान त्रिशला माता के 14 स्वप्न देखना एक उत्साहपूर्ण उत्सव है । मुनि रविन्द्र विजय महाराज एवं मुनि महेन्द्र विजय महाराज के सानिध्य में श्री वर्द्धमान जैन संघ में यह उत्सव भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के आनंद को दर्शाता है । मुनि रविन्द्र विजय महाराज के श्रीमुख से कल्पसूत्र ग्रंथ वाचन में भगवान महावीर के जन्म का प्रसंग आने से त्रिशला नंदन वीर की, जय बोलो महावीर की जयकारों से सभागार गूंज उठा । हर एक स्वप्न के प्रतीक को मंच पर उतारा गया और भाग्यशाली श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से उसे अपने मस्तक से लगाया और पालना जी (झूला) झुलाने का लाभ लिया । मुनि महेन्द्र विजय महाराज ने कहा माता त्रिशला ने 14 महास्वप्न देखे थे, जो संकेत थे कि उनके घर एक महान तीर्थंकर का जन्म होगा, जो धर्म, शांति और अहिंसा का मार्ग दिखायेगा । इन सभी सपनों का विस्तृत वर्णन जैन ग्रंथ कल्पसूत्र में मिलता है । इस दिन जैन समाज के श्रद्धालु पारम्परिक परिधान में एकत्रित होते हैं । श्री वर्द्धमान जैन संघ के ट्रस्टी, अध्यक्ष कमल सिंह रामपुरिया, विजय चन्द बैद, मुल्तान चन्द सुराणा, रतन चन्द बांगाणी, एस मिलाप चन्द, दिलीप दुगड़, महेन्द्र सुराणा, विनीत रामपुरिया, नरेन्द्र बांठिया, चातुर्मास प्रबन्ध समिति के संयोजक माणक चन्द सेठिया, मोहनलाल कोचर, शांतिलाल रामपुरिया, देवेन्द्र कोचर एवं कार्यकारिणी सदस्य सक्रिय हैं ।
