तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर अधिकार को लेकर ऋतब्रत गुट ने चुनाव आयोग के सामने रखा अपना पक्ष

कोलकाता, 12 सितंबर  तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर अधिकार को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। शनिवार को अंतिम सुनवाई के लिए दोनों गुटों को चुनाव आयोग के समक्ष बुलाया गया है। इससे पहले शनिवार को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने आयोग के साथ करीब एक घंटे 20 मिनट तक बैठक की। बैठक के बाद ऋतब्रत ने दावा किया कि आयोग की ओर से पूछे गए सभी सवालों के जवाब दे दिए गए हैं और मांगे गए दस्तावेज भी जमा करा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि उनका गुट तृणमूल कांग्रेस का चुनाव चिह्न हासिल करने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है।

‘असल’ तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले ऋतब्रत खेमे की ओर से ऋतब्रत बनर्जी के साथ अरूप राय, चंद्रिमा भट्टाचार्य, अखरुज्जमान और अधिवक्ता अमन झा चुनाव आयोग के कार्यालय पहुंचे थे। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में ऋतब्रत ने कहा कि आयोग के समक्ष उन्होंने तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि केवल मनगढ़ंत दावे नहीं किए गए हैं, बल्कि अपने दावे के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए हैं।

बैठक के बाद ऋतब्रत ने सीधे ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस में अब ‘न खाता, न बही, जो डॉक्टर ममता बनर्जी कहें वही सही’ वाली व्यवस्था नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी में किसी एक व्यक्ति की इच्छा से फैसले नहीं लिए जा सकते और न ही जब-तब मनमाने फैसले थोपे जा सकते हैं।

ऋतब्रत ने कहा, “तृणमूल कांग्रेस किसी परिवार की पार्टी नहीं है। तृणमूल कांग्रेस किसी की बपौती नहीं है। यह जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की पार्टी है।” खास बात यह रही कि जब वह ममता बनर्जी पर तीखा हमला कर रहे थे, उस समय उनके साथ चंद्रिमा भट्टाचार्य, अरूप राय और अखरुज्जमान जैसे ममता के पुराने समर्थक भी मौजूद थे।

ऋतब्रत ने कहा कि आयोग के समक्ष उनके गुट ने अपना पक्ष रखने के साथ जल्द फैसला लेने का अनुरोध भी किया है। हालांकि आयोग कब तक अपना निर्णय सुनाएगा, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

उल्लेखनीय है कि, पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 16 सितंबर है। दोनों गुट चाहते हैं कि इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद का समाधान हो जाए, ताकि उपचुनाव में पार्टी के नाम और प्रतीक को लेकर कोई असमंजस न रहे।

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