बंगाल में 1008 कुण्डीय यज्ञ एवं विराट सनातन महाअनुष्ठान की तैयारियों पर मुख्यमंत्री से आचार्य रामचन्द्र दास की विशेष चर्चा

 


कोलकाता। पूज्य आचार्य रामचन्द्र दास जी महाराज ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से भेंट कर बंगाल की धरती पर प्रस्तावित “1008 कुण्डीय यज्ञ एवं विराट सनातन महाअनुष्ठान” को लेकर विस्तृत चर्चा की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने भी इस भव्य धार्मिक आयोजन को लेकर उत्साह व्यक्त करते हुए आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।
आचार्य जी ने कहा कि लगभग 500 वर्षों के बाद बंगाल की धरती पर इतने विराट स्तर का सनातन आयोजन होने जा रहा है। उन्होंने इसे बंगाल की धर्मनिष्ठ जनता की आस्था और सनातन संस्कृति के प्रति बढ़ते विश्वास का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि बंगाल सदियों से धर्म, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना की भूमि रही है। चैतन्य महाप्रभु, रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद जैसी महान विभूतियों ने इसी धरती से भारतीय अध्यात्म और सनातन संस्कृति का संदेश विश्वभर में पहुंचाया। अब इस गौरवशाली परंपरा को नई पीढ़ी तक मजबूती से पहुंचाने की आवश्यकता है।
आचार्य जी ने कहा कि आज बंगाल के सनातन समाज में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है। उन्होंने उन परिवारों से भी अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से पुनः जुड़ने का आह्वान किया, जो किसी कारणवश अपनी मूल परंपराओं से दूर हो गए हैं। उन्होंने कहा, “अपने घर, अपने धर्म और अपनी संस्कृति की ओर लौटने में संकोच कैसा?”


बैठक में आचार्य जी ने रामानंद मिशन की ओर से पूरे पश्चिम बंगाल में 1008 स्थानों पर सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ कराने के संकल्प की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं, विद्यार्थियों और Gen Z को सनातन संस्कृति, संस्कारों और भारत की गौरवशाली आध्यात्मिक विरासत से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा केवल पहचान नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर है। युवाओं को साथ लेकर भक्ति, संस्कार, सामाजिक समरसता और सनातन चेतना को जन-जन तक पहुंचाना इस अभियान का प्रमुख लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री ने इस संकल्प की सराहना करते हुए प्रदेश सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि बंगाल की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण प्रदेश के गौरव से जुड़ा विषय है। शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित धार्मिक आयोजनों के लिए प्रशासन आवश्यक सहयोग और समन्वय करेगा।


आचार्य जी ने बंगाल में हो रहे विकास कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि विकास के साथ संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को सहेजकर आगे बढ़ने वाला बंगाल देश के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा संत समाज एवं सनातन परंपराओं के प्रति व्यक्त सम्मान और आत्मीयता पर प्रसन्नता जताई।
प्रस्तावित “1008 कुण्डीय यज्ञ एवं विराट सनातन महाअनुष्ठान” को सनातन चेतना के विस्तार, युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने तथा समाज में आध्यात्मिक एवं सामाजिक एकता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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