आसनसोल मे मंत्री के नाम का कथित इस्तेमाल कर पैसे लेने का आरोप, महिलाओं ने सड़क जाम कर किया प्रदर्शन

आसनसोल में बेबी सरकार के खिलाफ महिलाओं का प्रदर्शन, उधार के 80 हजार रुपये मांगने पर मारपीट का भी आरोप; पुलिस के आश्वासन के बाद हटा जाम

आसनसोल। आसनसोल शहर के मनोज सिनेमा हॉल के निकट महिलाओं ने एक महिला के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने बेबी सरकार नामक महिला पर कथित रूप से प्रभाव का इस्तेमाल करने, लोगों से पैसे लेने, धमकी देने तथा मारपीट करने जैसे आरोप लगाए। महिलाओं ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की मांग की। सड़क जाम की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर मामले की जांच तथा नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद महिलाओं ने सड़क जाम समाप्त कर दिया। बाद में प्रदर्शनकारियों ने थाने पहुंचकर पूरे मामले को लेकर लिखित शिकायत भी दर्ज कराई। प्रदर्शनकारी महिलाओं का आरोप है कि बेबी सरकार राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पाल के यहां काम करने का दावा करती हैं और कथित रूप से मंत्री के नाम का प्रभाव दिखाकर स्थानीय लोगों पर दबाव बनाने का प्रयास करती हैं। महिलाओं का यह भी आरोप है कि वह मंत्री के यहां कार्यरत बताए जा रहे पंकज दास का नाम लेकर भी लोगों पर कथित तौर पर प्रभाव जमाने और अपना काम निकालने का प्रयास करती हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने आरोप लगाया कि बेबी सरकार ने कथित तौर पर मंत्री अग्निमित्रा पाल और पंकज दास के नाम का इस्तेमाल करते हुए कुछ लोगों को विभिन्न काम कराने का भरोसा दिया। महिलाओं का दावा है कि इसी कथित प्रभाव का हवाला देकर कई लोगों से बड़ी रकम ली गई। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में लाखों रुपये के लेन-देन की बात सामने आई है। महिलाओं ने पुलिस से मांग की कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाए। उनका कहना था कि यदि किसी व्यक्ति ने मंत्री अथवा किसी राजनीतिक व्यक्ति के नाम का कथित रूप से इस्तेमाल कर लोगों से रुपये लिए हैं या उन्हें किसी प्रकार का प्रलोभन दिया है, तो इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए। इसके लिए शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज करने के साथ-साथ पैसों के लेन-देन से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस प्रकार के आरोपों से केवल शिकायतकर्ताओं को ही परेशानी नहीं होती, बल्कि जिस जनप्रतिनिधि या राजनीतिक संगठन का नाम कथित रूप से इस्तेमाल किया जाता है, उसकी छवि पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।प्रदर्शन के दौरान एक बुजुर्ग महिला ने बेबी सरकार पर अपने परिवार से जुड़े आर्थिक मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाया। महिला के अनुसार, उनके बेटे ने बेबी सरकार को करीब 80 हजार रुपये उधार दिए थे। महिला ने बताया कि उनके बेटे और बेटी दोनों का निधन हो चुका है और वर्तमान में वह अपने पोते-पोतियों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। बुजुर्ग महिला का आरोप है कि जब उन्होंने बेबी सरकार से अपने परिवार के उधार दिए गए रुपये वापस मांगे, तो कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की गई। महिला ने पुलिस के समक्ष मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की। महिला का कहना था कि आर्थिक कठिनाइयों के बीच वह अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। ऐसे में उनके परिवार द्वारा उधार दिए गए रुपये वापस मांगने पर कथित रूप से मारपीट किया जाना गंभीर मामला है। उन्होंने पुलिस से पूरे घटनाक्रम की जांच कर उन्हें न्याय दिलाने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल एक अन्य महिला ने भी बेबी सरकार के खिलाफ आरोप लगाए। महिला ने अपने पति से जुड़े एक पुराने मामले का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस मामले को लेकर भी उन्हें कथित तौर पर परेशान किया गया था। उन्होंने पुलिस से पुराने मामलों की भी जांच करने की मांग की। महिलाओं का कहना था कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ अलग-अलग लोगों की ओर से लगातार शिकायतें सामने आती हैं, तो पुलिस को सभी शिकायतों की जांच एक साथ करनी चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों के पीछे वास्तविक विवाद क्या है और किन आरोपों में तथ्य मौजूद हैं। पुराने राजनीतिक संबंधों को लेकर भी लगाए आरोप प्रदर्शनकारी महिलाओं ने बेबी सरकार के कथित पुराने राजनीतिक संपर्कों को लेकर भी आरोप लगाए। उनका दावा है कि पूर्व में उनके कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कुछ लोगों के साथ संपर्क रहे हैं तथा वसूली से संबंधित मामलों में भी उनका नाम सामने आता रहा है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में मंत्री अग्निमित्रा पाल और भाजपा से जुड़े नामों का कथित रूप से इस्तेमाल कर स्थानीय लोगों पर प्रभाव डालने या उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मांग की कि राजनीतिक संपर्कों से जुड़े इन आरोपों की भी जांच की जाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित राजनीतिक दल अथवा जिन व्यक्तियों के नाम प्रदर्शन के दौरान लिए गए, उनकी ओर से भी इस संबंध में फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पहले भी शिकायत किए जाने का दावा प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि बेबी सरकार के खिलाफ पहले भी पुलिस के समक्ष शिकायतें की गई थीं। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। महिलाओं ने कहा कि वे किसी व्यक्ति को बदनाम करने के उद्देश्य से प्रदर्शन नहीं कर रही हैं, बल्कि अपनी शिकायतों की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग को लेकर सड़क पर उतरी हैं। उन्होंने पुलिस से मांग की कि शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित सभी पक्षों को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए जाएं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाए।
पुलिस के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ सड़क जाम महिलाओं के सड़क जाम की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उनकी शिकायतों को सुना। पुलिस की ओर से मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद महिलाओं ने सड़क जाम समाप्त कर दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी महिलाएं थाने पहुंचीं और बेबी सरकार के खिलाफ अपनी शिकायत लिखित रूप में पुलिस को सौंपी।महिलाओं ने पुलिस से जल्द जांच शुरू करने तथा शिकायत में लगाए गए आरोपों की सच्चाई सामने लाने की मांग की। सड़क जाम समाप्त होने के बाद इलाके में यातायात सामान्य हुआ। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू करने की बात कही है। जांच के बाद सामने आएगी वास्तविकता
फिलहाल इस पूरे मामले में लगाए गए आरोप प्रदर्शनकारी महिलाओं और शिकायतकर्ताओं के दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं के बयान, संबंधित लोगों के बयान, कथित आर्थिक लेन-देन से जुड़े दस्तावेज, बैंक अथवा अन्य भुगतान संबंधी साक्ष्य तथा घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जा सकती है।
मामले में यह भी जांच का विषय होगा कि क्या वास्तव में मंत्री अग्निमित्रा पाल अथवा उनके कर्मचारियों के नाम का इस्तेमाल कर किसी व्यक्ति से रुपये लिए गए या लोगों पर किसी प्रकार का दबाव बनाया गया। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो पुलिस कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकती है। वहीं, बेबी सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मंत्री अग्निमित्रा पाल की ओर से भी इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक बयान प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच, संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस के समक्ष दर्ज शिकायत के बाद सभी की निगाहें जांच की दिशा और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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