रानीगंज बोरो-2 कार्यालय परिसर में सीटू का झंडा हटाकर लगाया गया तिरंगा व भाजपा का झंडा , भाजपा और सीटू के बीच बढ़ा राजनीतिक विवाद

रानीगंज। रानीगंज के बोरो-2 कार्यालय परिसर में आज उस समय राजनीतिक माहौल गर्म हो गया, जब भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) मंडल-1 के अध्यक्ष मोनू वर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के श्रमिक संगठन सीटू का झंडा हटाकर वहां भारत का राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) तथा भारतीय जनता पार्टी का झंडा लगा दिया। इस घटना को लेकर भाजपा और सीटू के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। इस दौरान मोनू वर्मा के साथ भाजपा नेता रवि केसरी सहित भारतीय जनता पार्टी एवं भारतीय जनता युवा मोर्चा के कई कार्यकर्ता उपस्थित थे। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए परिसर से सीटू का झंडा हटाया और उसकी जगह तिरंगा तथा भाजपा का झंडा फहराया।

भाजपा का पक्ष

भाजयुमो मंडल-1 के अध्यक्ष मोनू वर्मा ने कहा कि जिस राजनीतिक दल को पश्चिम बंगाल की जनता लगभग 15 वर्ष पहले सत्ता से बाहर कर चुकी है, उसके श्रमिक संगठन का झंडा आज भी एक सरकारी कार्यालय परिसर में लगा होना अनुचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी परिसर में किसी राजनीतिक या उससे संबद्ध संगठन का झंडा लगे रहना प्रशासनिक निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।उन्होंने बताया कि भाजपा नेता रवि केसरी के नेतृत्व में पहले भी संबंधित अधिकारियों से बोरो-2 कार्यालय परिसर से सीटू का झंडा हटाने की मांग की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी कारण भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने स्वयं झंडा हटाने का निर्णय लिया। मोनू वर्मा ने कहा कि वामपंथी शासनकाल में राज्य का विकास बाधित हुआ और जनता ने इसी कारण उन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया। ऐसे में सरकारी परिसर में सीटू का झंडा लगे रहना उचित नहीं था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय ध्वज का पूरा सम्मान किया जाएगा और निर्धारित नियमों के अनुसार उसे सम्मानपूर्वक उतारा जाएगा।

सीटू ने जताया कड़ा विरोध

वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर सीटू के रानीगंज को-ऑर्डिनेशन जॉइंट कन्वीनर हेमंत प्रभाकर ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भाजपा के युवा नेताओं द्वारा जिस प्रकार से सीटू का झंडा हटाया गया, वह लोकतांत्रिक परंपराओं के विरुद्ध है।हेमंत प्रभाकर ने कहा कि किसी चुनाव में हार या सत्ता परिवर्तन का अर्थ यह नहीं होता कि किसी राजनीतिक दल या उसके जनसंगठन को लोकतांत्रिक गतिविधियों, सभाओं अथवा रैलियों के अधिकार से वंचित कर दिया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में जिस प्रकार तृणमूल कांग्रेस पर अलोकतांत्रिक तरीके अपनाने के आरोप लगते रहे, अब भाजपा भी उसी राह पर चलती दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं के इस कदम से ऐसा प्रतीत होता है कि सत्ता में आने की संभावनाओं ने कुछ नेताओं में अहंकार पैदा कर दिया है और वे लोकतांत्रिक मर्यादाओं की अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस भारतीय जनता पार्टी में कभी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करते थे, उसी पार्टी के कुछ नेता आज लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान नहीं कर रहे हैं।

राजनीतिक सरगर्मी तेज

बोरो-2 कार्यालय परिसर में हुई इस घटना के बाद रानीगंज की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा इसे सरकारी परिसर को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त कराने की कार्रवाई बता रही है, जबकि सीटू इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन और राजनीतिक असहिष्णुता का उदाहरण बता रहा है। घटना के बाद क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

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