
चार दशक से रह रहे परिवारों ने उठाई पुनर्वास की मांग, नोटिस वापस नहीं लेने पर बड़े जनआंदोलन का ऐलान
रानीगंज। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) द्वारा जारी बेदखली नोटिस के विरोध में रानीगंज के तिराट कोलियरी स्थित काली मंदिर के समीप स्थानीय निवासियों ने व्यापक जनहस्ताक्षर अभियान चलाया। बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोगों ने इसमें भाग लेकर बेदखली के निर्णय का विरोध किया तथा अपने आवास और आजीविका की सुरक्षा की मांग उठाई। इस दौरान आयोजित बैठक में भविष्य की आंदोलनात्मक रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि स्थानीय लोगों के हस्ताक्षरों से तैयार ज्ञापन शीघ्र ही तिराट एरिया के ईसीएल अधिकारियों को सौंपा जाएगा। इसके साथ ही पूरे मामले से अवगत कराते हुए आसनसोल दक्षिण की विधायक अग्निमित्रा पाल को भी जनहस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वे पिछले लगभग 40 वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और लंबे समय से ईसीएल द्वारा उपलब्ध कराई गई बिजली सुविधा का उपयोग करते आ रहे हैं। ऐसे में अचानक ईसीएल प्रबंधन द्वारा बिजली आपूर्ति काटने और भूमि खाली करने का नोटिस जारी किए जाने से सैकड़ों परिवारों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। उनका कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक पुनर्वास की व्यवस्था किए बेदखली का फैसला मानवीय दृष्टि से उचित नहीं है। ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र के अनेक परिवारों के बच्चे आसपास के विद्यालयों में अध्ययनरत हैं। यदि इस समय उन्हें जबरन हटाया जाता है तो न केवल उनके सिर से छत छिन जाएगी, बल्कि बच्चों की शिक्षा भी गंभीर रूप से प्रभावित होगी। इसलिए ईसीएल प्रबंधन को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए बेदखली की प्रक्रिया तत्काल रोकनी चाहिए। स्थानीय निवासी परेश मंडल ने कहा कि यह आंदोलन केवल जनहस्ताक्षर अभियान तक सीमित नहीं रहेगा। यदि ईसीएल प्रशासन ने नोटिस वापस नहीं लिया और लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो क्षेत्र के लोग व्यापक जनआंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि अपने घर और अधिकारों की रक्षा के लिए अंतिम दम तक संघर्ष जारी रहेगा। रविवार के इस कार्यक्रम में अनिंद्य आचार्य मंडल, परेश बाउरी, जयंत बाउरी सहित तिराट क्षेत्र के बड़ी संख्या में महिला-पुरुष एवं स्थानीय निवासी उपस्थित रहे।आंदोलनकारियों ने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में चरणबद्ध आंदोलन, प्रदर्शन और अन्य लोकतांत्रिक कार्यक्रमों को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।
