अपने मांगों की अनदेखी से नाराज एनएचएम कर्मियों का कार्य बहिष्कार, सीएमओएच कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन

आसनसोल। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा  जारी हालिया बजट में विभिन्न वर्गों के कर्मचारियों के लिए वेतन वृद्धि एवं अन्य सुविधाओं की घोषणा किए जाने के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों में असंतोष गहरा गया है। अपनी लंबे समय से लंबित मांगों की उपेक्षा किए जाने के विरोध में एनएचएम कर्मियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाते हुए कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है।
बुधवार को पश्चिम बर्दवान के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमओएच) कार्यालय के समक्ष बड़ी संख्या में एनएचएम कर्मी एकत्रित हुए और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मियों ने कार्य बहिष्कार करते हुए धरना-प्रदर्शन किया तथा प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार को संबोधित एक ज्ञापन भी सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए शीघ्र समाधान की मांग उठाई। आंदोलनरत कर्मियों का कहना है कि वे वर्षों से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु रूप से संचालित करने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके बावजूद उनकी सेवा सुरक्षा, वेतनमान, पदोन्नति तथा स्थायीकरण जैसे मुद्दों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अन्य विभागों के कर्मचारियों के लिए वेतन वृद्धि और विभिन्न सुविधाओं की घोषणा करती है, जबकि एनएचएम कर्मियों की मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले इन कर्मचारियों को अभी तक समान कार्य के अनुरूप उचित वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। आंदोलन में शामिल कर्मियों ने ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’, स्थायी नियुक्ति, पूर्ण सरकारी कर्मचारी का दर्जा तथा सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग दोहराई। उन्होंने बताया कि पश्चिम बर्दवान जिले में लगभग 1065 एनएचएम कर्मी विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों और स्वास्थ्य परियोजनाओं में कार्यरत हैं। ये कर्मी वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में योगदान दे रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर इसे जिला स्तर से राज्य स्तर तक विस्तारित किया जाएगा तथा बड़े पैमाने पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस बीच स्वास्थ्य सेवाओं पर आंदोलन के संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है। यदि कार्य बहिष्कार लंबे समय तक जारी रहता है, तो आम लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि आंदोलनकारी कर्मियों का कहना है कि वे अपने अधिकारों और न्यायोचित मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं तथा जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल प्रशासन और राज्य सरकार के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग के साथ किसी सकारात्मक वार्ता की संभावना को लेकर भी चर्चा जारी है। वहीं एनएचएम कर्मियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अपनी मांगों के समाधान तक वे आंदोलन जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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