
15 दिनों में दुकानें खाली करने के निर्देश पर उठे सवाल, पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
आसनसोल। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) द्वारा संकतोड़िया कोलियरी मोड़ के समीप स्थित दुकानों पर बेदखली संबंधी नोटिस लगाए जाने के बाद क्षेत्र के छोटे व्यापारियों में असमंजस और चिंता का माहौल व्याप्त हो गया है। नोटिस में दुकानदारों से 15 दिनों के भीतर अपनी दुकानें खाली करने का अनुरोध किया गया है। इस निर्णय से प्रभावित व्यापारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा होने की आशंका जताई जा रही है। मामले को लेकर सोमवार को कुल्टी ब्लॉक युवा कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल ईसीएल मुख्यालय पहुंचा और प्रबंधन से मुलाकात कर दुकानदारों की समस्याओं के समाधान की मांग की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कुल्टी ब्लॉक युवा कांग्रेस के महासचिव मनीष बर्णवाल ने किया। उनके साथ जिला अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष फिरोज खान, वरिष्ठ कांग्रेस नेता काजल दत्ता, कुल्टी ब्लॉक युवा कांग्रेस अध्यक्ष पलाश भुइयां, नईम अंसारी सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि उनकी ईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) से सीधे मुलाकात कर मामले पर चर्चा करने की थी, लेकिन व्यस्तता के कारण यह संभव नहीं हो सका। हालांकि प्रबंधन की ओर से उन्हें आश्वासन दिया गया कि अगले दो दिनों के भीतर निदेशक (कार्मिक) के साथ बैठक का समय निर्धारित कर उन्हें बुलाया जाएगा, जहां इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
दुकानदारों की आजीविका पर मंडरा रहा संकट
युवा कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 18 जून को संकतोड़िया कोलियरी मोड़ स्थित अनेक दुकानों पर नोटिस चिपकाए गए, जिसमें 15 दिनों के भीतर परिसर खाली करने को कहा गया है। इससे वर्षों से व्यापार कर रहे छोटे दुकानदारों और उनके परिवारों के समक्ष रोजी-रोटी का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। महासचिव मनीष बर्णवाल ने कहा कि जिस भूमि को पहले वेस्टेड और डेंजर जोन घोषित किया गया था, उसी क्षेत्र में वर्षों से व्यापारिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। ऐसे में अचानक दुकानदारों को हटाने का निर्णय कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यदि भूमि पर अवैध कब्जा या किसी प्रकार की अनियमित वाणिज्यिक गतिविधि चल रही है तो कार्रवाई उन बड़े व्यवसायों पर होनी चाहिए, जो लंबे समय से बड़े पैमाने पर कारोबार कर रहे हैं, न कि उन गरीब और छोटे दुकानदारों पर, जिनकी पूरी आजीविका इन दुकानों पर निर्भर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवा कांग्रेस किसी प्रकार के टकराव या संघर्ष की राजनीति में विश्वास नहीं करती। संगठन का उद्देश्य प्रशासन और प्रबंधन के साथ संवाद स्थापित कर समस्या का शांतिपूर्ण और व्यावहारिक समाधान निकालना है। उन्होंने ईसीएल प्रबंधन से अपील की कि प्रभावित दुकानदारों के साथ खुले संवाद की प्रक्रिया शुरू की जाए और उन्हें स्थिति की स्पष्ट जानकारी दी जाए।
पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की उठी मांग
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि नोटिस मिलने के बाद से उनके बीच भय और अनिश्चितता का माहौल है। कई दुकानदार वर्षों से उसी स्थान पर अपना व्यवसाय चला रहे हैं और उनके परिवारों का भरण-पोषण पूरी तरह इसी आय पर निर्भर है। अचानक दुकानें खाली करने के आदेश ने उन्हें भविष्य को लेकर चिंतित कर दिया है। व्यापारियों ने सुझाव दिया कि यदि सुरक्षा, भूमि स्वामित्व अथवा अन्य प्रशासनिक कारणों से उन्हें हटाना अनिवार्य है, तो ईसीएल को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रभावित लोगों के पुनर्वास, उचित मुआवजे अथवा वैकल्पिक व्यावसायिक स्थल की व्यवस्था करनी चाहिए। उनका कहना है कि बिना किसी विकल्प के दुकानें हटाने से अनेक परिवार आर्थिक संकट में फंस जाएंगे।
आंदोलन की चेतावनी
युवा कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि प्रबंधन की ओर से संतोषजनक समाधान नहीं निकाला गया और दुकानदारों के हितों की अनदेखी की गई, तो संगठन बड़े पैमाने पर लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा। हालांकि फिलहाल संगठन वार्ता और आपसी सहमति के माध्यम से समाधान निकालने के पक्ष में है। वहीं दूसरी ओर, ईसीएल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में प्रभावित दुकानदारों और स्थानीय लोगों की निगाहें प्रस्तावित बैठक पर टिकी हुई हैं, जिससे इस पूरे विवाद के समाधान की दिशा तय हो सकती है। फिलहाल संकतोड़िया बाजार के व्यापारियों के बीच एक ही सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या उन्हें अपनी वर्षों पुरानी दुकानों से हाथ धोना पड़ेगा, या फिर प्रशासन और प्रबंधन उनकी आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए कोई व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत करेगा।
