
कोलकाता, 18 जून 2026: राष्ट्रीय कवि संगम, पश्चिम बंगाल प्रांत के तत्वावधान में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर एक भव्य ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘राष्ट्र जागरण धर्म हमारा’ के मूल मंत्र के साथ आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. गिरिधर राय ने की। इस कार्यक्रम में देशप्रेम और वीर रस की कविताओं का सुंदर संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. अशोक बत्रा उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में ओज के प्रख्यात कवि विनय विनम्र, छत्तीसगढ़ से मल्लिका रुद्रा और डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी ने शिरकत की। कार्यक्रम में प्रांतीय महामंत्री श्री बलवंत सिंह एवं प्रांतीय मंत्री व मीडिया प्रमुख श्री देवेश मिश्र की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारती मिश्रा की सुमधुर सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद मुख्य अतिथि डॉ. अशोक बत्रा ने अपने अत्यंत व्यस्त कार्यक्रम में से समय निकालकर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप पर एक हृदयस्पर्शी कविता प्रस्तुत की। कार्यक्रम का यह अत्यंत गौरवशाली क्षण रहा जब उनके साथ उपस्थित प्रसिद्ध रचनाकार विनय विनम्र ने भी घनाक्षरी छंद के माध्यम से महाराणा प्रताप का शानदार यशगान किया।
विशिष्ट अतिथि मल्लिका रुद्र ने अपने वक्तव्य में एक अत्यंत गंभीर और महत्वपूर्ण विषय साझा किया। उन्होंने कहा कि “हम सब अपने वीर शहीदों पर रचनाएँ लिखते और उनका पाठ करते हैं, किन्तु इस संदेश को समाज और आज की पीढ़ी तक पहुँचाना हमारा अनिवार्य दायित्व है। उन्होंने यह भी साझा किया कि शीघ्र ही इतिहास के पाठ्यक्रमों में बदलाव लाकर भारत की भूमि के वास्तविक वीर योद्धाओं और शासकों के गौरवमयी इतिहास पर आधारित पाठ पढ़ाए जाएँगे।”
डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी ने अवगत कराया कि “महाराणा प्रताप की वीरगाथा भारत के विभिन्न राज्यों में, अलग-अलग भाषाओं में रची गई है। इसके साथ ही उन्होंने एक विचारणीय जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत के संविधान के आरंभिक पृष्ठों पर देश की कई महान विभूतियों के चित्र और नाम अंकित हैं, किन्तु यह अत्यंत विचारणीय है कि त्याग, बलिदान एवं स्वाभिमान के प्रतीक महान योद्धा महाराणा प्रताप का नाम इन पन्नों में शामिल नहीं है, जिस पर उन्होंने निराशा भी जताई।”
इस काव्य गोष्ठी को मानस कुमार, मौसमी प्रसाद, कुंदन, विजय शर्मा ‘विद्रोही’, कमल पुरोहित ‘अपरिचित’ एवं भारती मिश्रा जैसे कई गुणी कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के पाठ से समृद्ध किया। अपने अध्यक्षीय भाषण के पश्चात डॉ. गिरिधर राय ने महाराणा प्रताप के जीवन पर एक अत्यंत ओजपूर्ण रचना सुनाई, जिसने सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में श्रोता के रूप में बैंक ऑफ़ इंडिया की राजभाषा अधिकारी ज्योति, सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया के विजय पाण्डेय तथा सिंगापुर से जुड़े शिशिर ढांढनिया उपस्थित थे।
काव्य गोष्ठी का कुशल संचालन मध्य कोलकाता की महामंत्री स्वागता बसु ने किया। कार्यक्रम के सफल संयोजन में रमाकांत सिन्हा और स्वागता बसु की भूमिका बेहद सराहनीय रही। अंत में रमाकांत सिन्हा ‘सुजीत’ के धन्यवाद ज्ञापन के साथ इस भव्य कार्यक्रम का समापन हुआ।
