
दुर्गापुर। पर्यावरण संरक्षण, किसानों की आर्थिक सशक्तता और भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पादन के उद्देश्य से पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दुर्गापुर के श्रीजनी ऑडिटोरियम में राज्यव्यापी प्राकृतिक कृषि कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्राकृतिक एवं जैविक खेती को जन-आंदोलन का स्वरूप देने तथा कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देने का संकल्प दोहराया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ पश्चिम बर्धमान के जिला शासक एस. पन्नोबलम, पांडेश्वर विधायक जितेन्द्र तिवारी, दुर्गापुर विधायक लक्ष्मण चन्द्र घुरई तथा बाराबनी विधायक अरिजीत रॉय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में पांडेश्वर विधायक जितेन्द्र तिवारी ने कहा कि प्राकृतिक कृषि केवल खेती की एक पद्धति नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन स्थापित करने वाली एक समग्र जीवनशैली है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाया जा सकता है।
कार्यशाला के दौरान किसानों के विकास, जैविक एवं प्राकृतिक खेती के विस्तार, जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि, आधुनिक कृषि तकनीकों के समावेश तथा कृषि उत्पादों के प्रभावी विपणन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक खेती की आधुनिक एवं व्यावहारिक तकनीकों से अवगत कराते हुए इसे भविष्य की कृषि व्यवस्था की मजबूत नींव बताया।
बाराबनी विधायक अरिजीत रॉय ने अपने वक्तव्य में कहा कि प्राकृतिक कृषि उत्पादन लागत को कम करने के साथ-साथ भूमि की उर्वरता को संरक्षित करती है तथा उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए और प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यशाला से यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि पर्यावरण संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र के सतत विकास के लिए प्राकृतिक कृषि ही भविष्य का सबसे प्रभावी और व्यवहारिक मार्ग है।
राज्य सरकार की यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने तथा हरित, स्वस्थ और समृद्ध भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
