राजनीतिक रंजिश में सुलग उठा कुल्टी: पीएम मोदी के स्वास्थ्य के लिए पूजा करने पर बीजेपी कार्यकर्ता के परिवार पर खूनी हमला, गर्भवती महिला को भी नहीं बख्शा!

कुल्टी:कुल्टी विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 58 के अंतर्गत आने वाले धेमोमेन कोलियरी (6 नंबर शिवमंदिर परिसर) में बुधवार की रात राजनीतिक रंजिश का एक खौफनाक चेहरा सामने आया है। केंद्र सरकार के सफल कार्यकाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तम स्वास्थ्य के लिए आयोजित पूजा-आरती के बाद, देर रात भाजपा कार्यकर्ता के घर पर जानलेवा हमला बोल दिया गया। इस हमले में न सिर्फ पुरुष घायल हुए, बल्कि एक गर्भवती महिला के साथ भी बेरहमी से मारपीट की गई।पूजा के बाद भड़की हिंसा, धारदार हथियारों से हमलाबुधवार शाम भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शिवमंदिर परिसर में पीएम मोदी की दीर्घायु के लिए विशेष पूजा, महाआरती और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम रखा था। कार्यक्रम शांतिपूर्ण संपन्न होने के बाद, देर रात भाजपा कार्यकर्ता ब्रजू यादव और उनके परिवार पर अचानक हमला कर दिया गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से लैस बदमाशों ने उनके घर पर धावा बोला। इस हमले में ब्रजू यादव और उनके भाई बबलू यादव गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।गर्भवती महिला से बदसलूकी और मारपीट का आरोपपीड़ित पक्ष का कहना है कि हमलावरों ने घर की महिलाओं को भी निशाना बनाया। उनके साथ गाली-गलौज और बदसलूकी की गई। हद तो तब हो गई जब घर की एक गर्भवती महिला को भी धक्का देकर जमीन पर गिराया गया और उसके साथ मारपीट की गई। घटना के बाद से पूरे इलाके के आम लोगों में भारी आक्रोश और दहशत का माहौल है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आसनसोल दक्षिण थाने की पुलिस और केंद्रीय बलों को तैनात कर दिया गया है।आरोपों के घेरे में निवर्तमान पार्षद, स्थानीय महिलाओं ने बताया ‘मसीहा’पीड़ित परिवार ने इस हमले का सीधा आरोप इलाके के रोहित नुनिया, उनके बेटों और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के हाल ही में इस्तीफा दे चुके पार्षद संजय नुनिया पर लगाया है। हालांकि, इस मामले में एक नया मोड़ भी सामने आया है।इलाके की स्थानीय महिलाओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक सोची-समझी साजिश बताया है। महिलाओं का कहना है कि:संजय नुनिया और रोहित नुनिया गंभीर शारीरिक बीमारी के कारण इलाके से बाहर (अस्पताल/इलाज के लिए) हैं।घटना के वक्त उनके घर पर कोई पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था।कुछ लोग आपसी लड़ाई को राजनीतिक रंग देकर संजय और रोहित नुनिया को जानबूझकर फंसा रहे हैं।स्थानीय लोगों के मुताबिक, संजय नुनिया इलाके के गरीबों के लिए ‘भगवान’ जैसे हैं, जो लोगों को रोजगार देते हैं। इसी लोकप्रियता के कारण विरोधी उनसे जलते हैं और उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है कि यह हमला वाकई राजनीतिक रंजिश थी या फिर आपसी विवाद को राजनीतिक मोड़ दिया जा रहा है। असली दोषियों की पहचान के लिए पुलिस चश्मदीदों और सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी है।

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