रानीगंज के ऐतिहासिक राजाबांध तालाब पर प्रशासन सख्त, विधायक पार्थ घोष ने अवैध कब्जाधारियों को दी चेतावनी

रानीगंज। रानीगंज के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध राजाबांध तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराने तथा उसके पुराने गौरव को वापस दिलाने के उद्देश्य से प्रशासन अब पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। इसी क्रम में रविवार को रानीगंज के विधायक पार्थो घोष ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ राजाबांध तालाब का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने तालाब की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए साफ शब्दों में कहा कि तालाब की एक इंच जमीन पर भी अवैध कब्जा किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विधायक के निरीक्षण की खबर मिलते ही तालाब क्षेत्र में हलचल तेज हो गई। इस दौरान रानीगंज बीएलआरओ (भूमि सुधार विभाग के अधिकारी), रानीगंज थाना प्रभारी, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर उपस्थित रहे। अधिकारियों ने तालाब और उसके आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया।बताया जाता है कि लगभग 121 बीघा क्षेत्रफल में फैला यह विशाल राजाबांध तालाब कभी रानीगंज की पहचान माना जाता था। वर्षों पहले यह तालाब धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था। यहां भव्य रूप से छठ पूजा सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता था। स्थानीय लोग तालाब के पानी का उपयोग घरेलू कार्यों और पेयजल के रूप में भी करते थे। इसके अलावा तालाब में बड़े पैमाने पर मछली पालन होने के कारण रानीगंज के बाजारों में मछलियों के दाम अपेक्षाकृत कम रहते थे। निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए विधायक पार्थ घोष ने कहा कि राजाबांध तालाब रानीगंज की ऐतिहासिक धरोहर है, लेकिन धीरे-धीरे अवैध कब्जों और अनियंत्रित निर्माण कार्यों ने इसकी स्थिति को बदहाल कर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक धरोहर से वंचित हो जाएंगी। विधायक ने अवैध कब्जाधारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जल्द ही प्रशासन द्वारा पूरे 121 बीघा तालाब क्षेत्र की विधिवत पैमाइश कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने तालाब की जमीन या उसके किनारे अवैध निर्माण कर रखा है, वे स्वयं ही उसे हटा लें। मापी के बाद यदि किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा पाया गया, तो प्रशासन सख्त कार्रवाई करते हुए उसे हटाएगा और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।विधायक के इस सख्त रुख के बाद तालाब के आसपास अवैध निर्माण करने वालों में हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन इसी तरह सक्रिय रहा, तो राजाबांध तालाब को एक बार फिर उसका पुराना स्वरूप और गौरव वापस मिल सकता है। क्षेत्र के नागरिकों ने भी प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि ऐतिहासिक राजाबांध तालाब को अतिक्रमण मुक्त कर उसका सौंदर्यीकरण किया जाएगा, जिससे यह स्थान फिर से धार्मिक, सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र बन सके।

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