
भाजपा प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी में द्रौपदी मुर्मू, नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की तस्वीरें लगाई गईं
रानीगंज। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सरकारी कार्यालयों में प्रशासनिक बदलाव का सिलसिला लगातार जारी है। इसी क्रम में बुधवार को रानीगंज में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब रानीगंज दो नंबर बोरो कार्यालय से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीर हटा दी गई। इस घटना के बाद इलाके की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है और इसे नई सरकार के प्रशासनिक बदलाव के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार भाजपा के रानीगंज शहर मंडल अध्यक्ष शमशेर सिंह के नेतृत्व में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल रानीगंज दो नंबर बोरो कार्यालय पहुंचा। वहां प्रतिनिधिमंडल ने बोरो चेयरमैन मुजम्मिल हुसैन शहजादा से मुलाकात कर सरकारी कार्यालयों में वर्तमान संवैधानिक पदाधिकारियों की तस्वीरें लगाने की मांग रखी। इस दौरान भाजपा जिला कमेटी सदस्य मनोज ओझा, आनंद साव, बादशाह चटर्जी, मोनू वर्मा सहित कई भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे। भाजपा नेताओं की मांग के बाद बोरो कार्यालय के चेंबर से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीर हटाकर वहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की तस्वीरें लगाई गईं।
“सरकारी कार्यालय किसी व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं” — शमशेर सिंह
इस मौके पर भाजपा नेता शमशेर सिंह ने कहा कि सरकारी कार्यालय किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष की निजी संपत्ति नहीं होते, बल्कि यह जनता और प्रशासन से जुड़े संस्थान हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में नई सरकार बनने के बाद प्रशासनिक नियमों और परंपराओं के अनुसार सरकारी कार्यालयों में केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री की तस्वीरें ही लगाई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और संवैधानिक मर्यादा को प्राथमिकता दे रही है तथा सरकारी दफ्तरों में उसी अनुरूप बदलाव किए जा रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
घटना के बाद रानीगंज सहित पूरे आसनसोल-दुर्गापुर औद्योगिक क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद सरकारी कार्यालयों में हो रहे इस प्रकार के बदलाव केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक संदेश देने वाले कदम भी माने जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच भी इस घटनाक्रम को लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक ओर भाजपा समर्थक इसे नई सरकार की प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों के समर्थकों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा बनी हुई है। रानीगंज बोरो कार्यालय में हुई इस कार्रवाई के बाद अब अन्य सरकारी कार्यालयों में भी इसी प्रकार के बदलाव की संभावना को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
