
लंबी खींचतान के बाद ताला तोड़कर कार्रवाई, अवैध कब्जे और बिना अनुमति किराये पर देने के आरोप
आसनसोल। लंबे समय से विवादों में घिरे आसनसोल के कल्याणपुर स्थित सागुन मैरिज हॉल को लेकर सोमवार को आसनसोल नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आखिरकार हॉल का कब्जा अपने हाथ में ले लिया। नगर निगम अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में वार्ड संख्या 23 स्थित इस मैरिज हॉल का ताला तोड़कर भवन को निगम के अधीन कर लिया गया।यह कार्रवाई सोमवार सुबह आसनसोल नगर निगम के अधिवक्ता सुदीप्तो घटक और इंजीनियर आर.के. श्रीवास्तव के नेतृत्व में की गई। कार्रवाई के दौरान नगर निगम के कई कर्मचारी और संबंधित विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। पूरे घटनाक्रम को लेकर इलाके में काफी चर्चा का माहौल बना रहा। नगर निगम के अधिवक्ता सुदीप्तो घटक ने बताया कि यह मैरिज हॉल आसनसोल नगर निगम की संपत्ति है, जिस पर कथित रूप से पार्षद सी.के. रेशमा द्वारा “आसनसोल वेलफेयर सोसाइटी” के नाम पर कब्जा बनाए रखा गया था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में मैरिज हॉल संचालन के लिए हुए टेंडर में हिस्सा लेने के बावजूद संबंधित पक्ष को टेंडर नहीं मिला था, लेकिन इसके बाद भी हॉल की चाबी नगर निगम कार्यालय में जमा नहीं कराई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर नहीं मिलने के बावजूद मैरिज हॉल को विभिन्न सामाजिक और निजी कार्यक्रमों के लिए किराये पर दिया जाता रहा। इस संबंध में नगर निगम और पुलिस प्रशासन के पास कई शिकायतें भी दर्ज कराई गई थीं, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। सुदीप्तो घटक ने यह भी बताया कि इससे पहले जब नगर निगम कर्मचारी हॉल को कब्जामुक्त कराने पहुंचे थे, तब उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था, जिसके कारण कार्रवाई प्रभावित हुई थी। हालांकि हाल ही में कुछ चाबियां निगम को सौंप दी गई थीं, लेकिन मुख्य चाबी नहीं लौटाई गई। इसी कारण सोमवार को निगम अधिकारियों ने ताला तोड़कर भवन का आधिकारिक कब्जा ले लिया। नगर निगम की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि पिछले समय में हॉल को किराये पर देकर जो आय अर्जित की गई, उसका पूरा हिसाब संबंधित पक्ष से लिया जाएगा। निगम प्रशासन पूरे मामले की वित्तीय जांच भी कर सकता है.वहीं दूसरी ओर, पार्षद सी.के. रेशमा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही अनिमेष दास के माध्यम से मैरिज हॉल की चाबी जमा कर दी थी। उन्होंने दावा किया कि मामले को अनावश्यक रूप से विवादित बनाया जा रहा है। फिलहाल नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय लोगों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
