रानीगंज में ‘सिंडिकेट राज’ के खिलाफ व्यापारियों का फूटा गुस्सा, कोयला कारोबार ठप करने की चेतावनी

कोल ट्रेडर्स यूनियन की बैठक में अवैध वसूली और रंगदारी पर उठा बड़ा सवाल

रानीगंज। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद औद्योगिक क्षेत्रों में वर्षों से चले आ रहे कथित ‘सिंडिकेट राज’, रंगदारी और अवैध वसूली के खिलाफ अब व्यापारियों की आवाज मुखर होने लगी है। शनिवार को रानीगंज के पंजाबी मोड़ इलाके में कोल ट्रेडर्स यूनियन के बैनर तले ईसीएल (ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के डीओ होल्डर्स की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में कोयला व्यापारी शामिल हुए और कोलियरियों से कोयला उठाव में बाधा, कथित रंगदारी और अवैध वसूली को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। बैठक के दौरान व्यापारियों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध नहीं कराया गया, तो कोयला कारोबार पूरी तरह ठप हो सकता है।

“60 वर्षों में पहली बार इतना खराब माहौल देखा” — सतीश खेमका

वरिष्ठ कोयला कारोबारी सतीश खेमका ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि उनका परिवार पिछले लगभग छह दशकों से कोयला व्यवसाय से जुड़ा हुआ है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कारोबार की स्थिति सबसे अधिक खराब हुई है.उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत में मामूली रकम ‘खुशी’ या ‘सहयोग’ के नाम पर ली जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे यह बड़े स्तर की अवैध वसूली में बदल गई। उन्होंने कहा कि पैसे नहीं देने पर मशीनें बंद करा दी जाती थीं, ट्रांसपोर्ट रोक दिया जाता था और कोयला उठाव में बाधा पहुंचाई जाती थी। सतीश खेमका ने कहा कि इस तरह के माहौल में व्यवसाय करना बेहद कठिन हो गया है और व्यापारी मानसिक एवं आर्थिक दोनों तरह के दबाव में काम करने को मजबूर हैं।

रानीगंज के कोयला व्यापार पर संकट के बादल

व्यापारियों ने कहा कि रानीगंज का कोयला देशभर में अपनी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन कथित रंगदारी और अतिरिक्त अवैध खर्चों के कारण इसकी लागत लगातार बढ़ती जा रही है.व्यापारियों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण स्थानीय कारोबारी अब दूसरे राज्यों के व्यापारियों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं। इससे न केवल व्यापार प्रभावित हो रहा है, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। बैठक में मौजूद कई व्यापारियों ने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारी पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।

कोलियरियों में काम रुकवाने और वसूली के आरोप

बैठक के दौरान व्यापारियों ने आरोप लगाया कि पिछले 4 तारीख से कई कोलियरियों में कोयला उठाव बाधित किया जा रहा है। सतीश खेमका ने विजय सिंह और मैजुल नामक दो व्यक्तियों का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उनके समर्थक कथित रूप से कोलियरियों में पहुंचकर काम रुकवा रहे हैं और भारी रकम की मांग कर रहे हैं.व्यापारियों ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से पूरे व्यापारिक समुदाय में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन जल्द सख्त कार्रवाई नहीं करता है, तो कोयला व्यापार पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।

राजनीतिक बदलाव के बाद व्यापारियों को नई उम्मीद

बैठक में मौजूद व्यापारियों ने कहा कि राज्य में राजनीतिक बदलाव के बाद अब उन्हें निष्पक्ष और भयमुक्त माहौल मिलने की उम्मीद जगी है। व्यापारियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के उन बयानों का उल्लेख किया, जिनमें भ्रष्टाचार, कट मनी और रंगदारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही गई थी। व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि नई व्यवस्था में प्रशासन ऐसे तत्वों के खिलाफ कठोर कदम उठाएगा और उद्योगों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करेगा।

पुलिस प्रशासन को सौंपा जाएगा ज्ञापन

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जल्द ही डीओ होल्डर्स की एक और बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी। इसके बाद पुलिस कमिश्नर और जिला प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपकर दोषियों की गिरफ्तारी, कोलियरियों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा भयमुक्त वातावरण में व्यापार संचालन सुनिश्चित करने की मांग की जाएगी। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे।

बड़ी संख्या में व्यापारी रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण बैठक में पवन केजरीवाल, सौरभ अग्रवाल, संजय तोदी, राजा साव सहित सैकड़ों डीओ होल्डर्स और कोयला व्यापारी उपस्थित रहे। सभी व्यापारियों ने एकजुट होकर अवैध वसूली और कथित सिंडिकेट व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद की और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की।

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